ऊंची जाति के पिता व अनुसूचित जनजाति की माँ से पैदा हुए बच्चे को आरक्षण का लाभ नहीं

गुजरात हाईकोर्ट ने व्यवस्था दी है कि ऊंची जाति के पिता और अनुसूचित जनजाति की मां के संबंध से पैदा हुए बच्चे को आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा। मुख्य न्यायाधीश एस.जे. मुखोपाध्याय और न्यायाधीश ए.एस. दवे की पीठ ने हाल ही में रमेश नेका नामक व्यक्ति की याचिका पर सुनवाई के बाद यह फैसला दिया। नेका ने हाईकोर्ट की एकल पीठ के फैसले को चुनौती दी थी। एकल पीठ के न्यायाधीश ने यह जानने के बाद कि उसके पिता ऊंची जाति के हैं, उसका जाति प्रमाणपत्र रद्द करने के पंचमहल जिले के अधिकारियों के आदेश को सही ठहराया था।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा, भारत के संविधान के तहत यह पहले से तय है कि कोई भी व्यक्ति जिसे अगड़ी जाति में पैदा होने के कारण जीवन की शुरूआत में लाभ मिला वह गोद लेने से, शादी करने से या धर्म परिवर्तन करने से आरक्षण का लाभ पाने के योग्य नहीं हो जाता।

अदालत ने आगे कहा कि अपीलकर्ता नेका अगड़ी जाति के पिता की संतान है। हिंदू नियम के अनुसार, उन्हें इनकी जाति पिता से मिली न कि अनुसूचित जनजाति की इनकी मां से। इस वजह से अपीलकर्ता को उस दौर से नहीं गुजरना पड़ा जिसे अनुसूचित जाति या जनजाति के लोग झेलते हैं।
नेका ने कहा था कि उसका लालन पालन जनजातीय समाज में हुआ क्योंकि आदिवासी लड़की से शादी के बाद उसके पिता को समाज से निकाल दिया गया था। अदालत ने इस तर्क को खारिज कर दिया।
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3 thoughts on “ऊंची जाति के पिता व अनुसूचित जनजाति की माँ से पैदा हुए बच्चे को आरक्षण का लाभ नहीं”

  1. 'हिन्दू नियमों के अनुसार’ इस 'वर्ण-शंकर' की जाति को अदालत भले ही सवर्ण करार दे , जाति तोड़ने वालों को भले ही आरक्षण न दें लेकिन प्राथमिकता तो देनी चाहिए । अदालत का यह फैसला जाति विहीन समाज निर्माण की दिशा में नकारात्मक और अवरोधात्मक साबित होगा ।

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  2. आरक्षण का लाभ जातिगत आधार नहीं होना चाहिये, यह आर्थिक आधार पर होना चाहिये।

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