नौकरी में वरिष्ठता का निर्धारण, तदर्थ सेवावधि पर विचार कर नहीं हो सकता

सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि किसी भी व्यक्ति की वरिष्ठता का निर्धारण उसकी तदर्थ सेवावधि पर विचार कर नहीं किया सकता। दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के निदेशक की अपील स्वीकारते हुए जस्टिस मार्कडेय काटजू और जस्टिस आरएम लोढा की खंडपीठ ने यह व्यवस्था दी।

इस मामले में, प्रतिवादी डी पी सिंह 1964 में उत्तर प्रदेश पुलिस में उपनिरीक्षक (एसआई) बने थे। उन्हें 1966 को प्रतिनियुक्ति पर सीबीआई में बतौर एसआई भेजा गया। जहां 31 दिसंबर 1970 को उन्हें निरीक्षक नियुक्त किया गया और 24 नवंबर 1977 को तदर्थ आधार पर उन्हें डीएसपी बना दिया गया। बतौर डीएसपी उनकी सेवा 29 जून 1987 को स्थायी की गई। वह 1977 से 1987 के बीच की अवधि को अपनी वरिष्ठता निर्धारण में शामिल कराना चाहते थे, जिसे सीबीआई ने मानने से इनकार कर दिया।
खंडपीठ ने कहा कि यह सच है कि प्रतिवादी सीबीआई द्वारा 1977 में कार्यकारी पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) नियुक्त किया गया था और वह 1987 में सेवा नियमित होने तक इसी तरह अपनी सेवा देता रहा। अब सवाल यह है कि उसकी वरिष्ठता निर्धारित करने में उक्त अवधि पर विचार किया जाए या नहीं। तो हमारे विचार में इसका जवाब नकारात्मक है। ऎसा इसलिए क्योंकि कार्यालय विवरणिका में इस बात का स्पष्ट उल्लेख है कि सेवा नियमित (स्थायी) होने की तिथि के आधार पर ही ग्रेड में वरिष्ठता तय की जाएगी।
VN:F [1.9.22_1171]
Rating: 0.0/10 (0 votes cast)
Print Friendly, PDF & Email

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *


Enable Google Transliteration.(To type in English, press Ctrl+g)