बिना लायसेंस ब्याज पर पैसा देने वाले, कर्ज़दार का चेक बाउंस होने पर मुकद्दमा नहीं कर सकते

बम्बई उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा कि गैर लाइसेंसधारी सूदखोर कर्जदार से कर्ज की अदायगी के तौर पर मिला चेक बाउंस होने की स्थिति में फौजदारी अदालत का दरवाजा नहीं खटखटा सकते। बम्बई उच्च न्यायालय की औरंगाबाद पीठ में पिछले सप्ताह न्यायमूर्ति पी आर बोरकार ने कहा बिना लाइसेंस के सूद पर पैसा देने से संबंधी कारोबार करने वाला कोई व्यक्ति कर्ज वसूली के लिए अदालत का दरवाजा नहीं खटखटा सकता

अहमदाबाद स्थित अनिल कटारिया ने परकाम्य लिखित अधिनियम (नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट) के तहत चेक बाउंस के मामले में निचली अदालत के निर्णय के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील की थी। कटारिया के अनुसार उन्होंने अक्तूबर 2004 में पुरूषोत्तम कावने को चार लाख रूपये का कर्ज दिया था। इसी के भुगतान के लिए कावरे ने मार्च 2005 में उन्हें (कटारिया को) चेक दिया लेकिन यह बाउंस कर गया।

कटारिया ने इस मामले में परकाम्य लिखित अधिनियम के तहत आपराधिक मामला दर्ज कराया लेकिन कावरे के वकील ने दलील दी कि कटारिया बिना लाइसेंस के यह कारोबार कर रहे हैं और दस अन्य लोगों के खिलाफ भी मामला दर्ज करा चुके हैं।

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