बलात्कार की शिकार महिला से अदालत में ऐसे सवाल-ज़वाब कि उसने खुदकुशी कर ली

बलात्कार की शिकार एक महिला से अदालत में इस तरह के सवाल पूछे गए कि उसने खुदकुशी कर ली। दिल दहला देने वाला ये वाकया हुआ देश की राजधानी दिल्ली में। बलात्कार की शिकार एक महिला बयान दर्ज करवाते करवाते अदालत में बुरी तरह टूट गई और रोने लगी। अदालत से उसने गुहार लगाई कि वो अपनी मां से मिलना चाहती है। सरकारी वकील ओ.पी. सक्सेना के मुताबिक कोर्ट ने अपने रिकार्ड में लिखा था कि महिला से इस तरह से जिरह की गई कि वो बेहद मानसिक तनाव में आ गई।

अदालत से घर जाने के बाद वो महिला रात भर रोती रही। घरवालों ने समझाने की लाख कोशिश की लेकिन सब बेकार। फिर अगली सुबह जो हुआ, उसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। बलात्कार की शिकार वो महिला अपने कमरे में पंखे से लटक रही थी।

इस महिला के साथ उसके पति की मौजूदगी में ही पहले देवर ने बलात्कार किया था और फिर उसकी सास ने भी उसका शारीरिक शोषण किया।

अदालत से लौटने के बाद आरोपियों के घरवालों ने उसे और उसके परिवार को धमकाना शुरू कर दिया। ये कहा गया कि वो कुछ भी नहीं कर पाएगी।

इस पूरे वाकये का खुलासा तब हुआ, जब आरोपी यानि कि महिला का देवर जमानत के लिए दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा। कोर्ट ने निचली अदालत का पूरा रिकार्ड तलब कर लिया और उसी से पता चला कि खुदकुशी करने से ठीक पहले महिला के साथ कोर्ट में इस तरह के सवाल पूछे गए थे कि वो पूरी तरह से टूट गई।

दिल्ली हाईकोर्ट के जज कैलाश गंभीर ने आरोपी की जमानत अर्जी खारिज करते हुए साफ कहा कि ये बात कतई नहीं भूली जा सकती कि क्रॉस एक्जामिनेशन में उस महिला को इतनी मानसिक प्रताड़ना दी गई कि उसने आत्महत्या तक कर ली।

अपने कई आदेशों में सुप्रीम कोर्ट ये कह चुका है कि बलात्कार जैसे मामलों की सुनवाई के दौरान निचली अदालतों को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि ट्रायल का सामना आरोपी कर रहा है, बलात्कार की पीड़ित बेबस महिला नहीं।

बलात्कार की शिकार महिला के साथ अदालत में ऐसा कुछ भी नहीं होना चाहिए कि उसे अपने साथ हुआ घृणित अपराध याद आ जाए। सुप्रीम कोर्ट ने चार साल पहले ये आदेश दिया था। 2005 में साफ कहा गया था कि मुकदमे के दौरान बलात्कार पीड़ित महिला का दुख-दर्द ध्यान में रखना चाहिए। ट्रायल इन कैमरा होना चाहिए यानि ऐसे लोग अदालत में नहीं रहेंगे जिनका इस केस से कोई लेनादेना नहीं है। बलात्कार मामलों की सुनवाई कर रही अदालत की जज महिला होनी चाहिए। केस में दलीलें दे रही सरकारी वकील भी महिला होनी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने 2005 में ये भी कहा था कि मुकदमे के दौरान जज की जिम्मेदारी ज्यादा बढ़ जाती है। उन्हें इस बात को ध्यान में रखना चाहिए कि पीड़ित महिला के साथ बचाव पक्ष के वकील ऐसे सवाल नहीं पूछें, जिनसे पहले से ही बलात्कार का दर्द झेल रही महिला की गरिमा को ठेस पहुंचे।

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6 thoughts on “बलात्कार की शिकार महिला से अदालत में ऐसे सवाल-ज़वाब कि उसने खुदकुशी कर ली”

  1. is baat se ek baat mere khayal me ayi…Kal Bhopal se prakashit ek ekhbar me khabar thi, Mahila se balatkar kar ki loot. main vishmay se bhar gaya ki blatkar ke bad lutne ko bacha kya ??? kisi ki izzat se bada kya lutega koi?!

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  2. जब जिरह हो रही थी तब उस अदालत का जज कहाँ था? क्या उस की जिम्मेदारी तय नहीं होनी चाहिए? ऐसे जज को को जज बने रहने का क्या हक है? जिस की उपस्थिति में इस तरह के प्रश्न एक पीड़िता से किए गए।

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  3. न्याय की देवी तो आँख बंद किये हुए हैं, और बाकी उनके भगत सब भ्रष्ट हैं ऐसा लगता है कि जनता को कानून अपने हाथ में ले लेना चाहिये, इस दिखावटी कानून से छुटकारा पाने के लिये।

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  4. bahut bure halat hain aur jab tak kanoon sakht nhi hoga tab tak………………..???

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  5. शर्मनाक … द्विवदी जी से सहमत.

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