क्या शिक्षा प्रणाली को तीन वर्षीय पाठ्यक्रम में बदला जा सकता है?: हाई कोर्ट ने पूछा

ग्रामीण इलाकों में गरीबों तक मूलभूत स्वास्थ्य सुविधाओं के न पहुंच पाने की सच्चाई को गंभीरता से लेते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय ने 18 नवम्बर को स्वास्थ्य मंत्रालय को एक नोटिस जारी कर पूछा है कि क्या एमबीबीएस के वर्तमान पांच वर्षीय पाठ्यक्रम को घटा कर तीन वर्ष का किया जा सकता है? मुख्य न्यायाधीश अजीत प्रकाश शाह और न्यायमूर्ति एस.मुरलीधर की खंडपीठ ने एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए स्वास्थ्य मंत्रालय और भारतीय चिकित्सा परिषद से कहा है कि उन्हें एमबीबीएस पाठ्यक्रम में बदलाव करने पर विचार करना चाहिए ताकि ग्रामीण आबादी तक मूलभूत स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंच सकें। अदालत ने अगली सुनवाई की तारीख नौ दिसंबर तय कर दी है और इस तारीख तक मंत्रालय को अपना जवाब देने का निर्देश दिया है।

अदालत ने कहा कि यह एक बहुत महत्वपूर्ण मुद्दा है। लगभग 80 प्रतिशत ग्रामीण आबादी मूलभूत सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित है और इस सच्चाई पर गंभीरता के साथ विचार किया जाना चाहिए। सरकार से शिक्षा के वर्तमान स्तर में सुधार का सुझाव देते हुए अदालत ने कहा कि आपको पांच वर्षीय एमबीबीएस पाठ्यक्रम में बदलाव करना है ताकि प्रशिक्षण पाने वाले चिकित्सक अच्छी आमदनी के लालच में न तो दूसरे देशों में जाए और न महानगरों में चिपके रह जाएं। शिक्षा प्रणाली को तीन वर्षीय पाठ्यक्रम में बदला जाना चाहिए ताकि प्रत्येक चिकित्सक ग्रामीण आबादी को अपनी सेवाएं दे सके। अदालत जन स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ.मीनाक्षी गौतम द्वारा दायर एक जनहित याचिका की सुनवाई कर रही है।
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