अदालत, मकान मालिक को निर्देश नहीं दे सकती है कि वह मकान का कैसा इस्तेमाल करे

सुप्रीम कोर्ट ने व्यवस्था दी है कि अदालत, मकान मालिक को इस बात का निर्देश नहीं दे सकती है कि उसे अपने मकान के किस हिस्से का वाणिज्यिक और किस हिस्से का रिहायशी उद्देश्य के लिए इस्तेमाल करना चाहिए। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ मकान मालिक उदय शंकर उपाध्याय की अपील को स्वीकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह बात कही। हालांकि न्यायाधीश मार्कण्डेय काटजू और न्यायाधीश आर एम लोढा की खण्डपीठ ने किराएदार को हिस्सा खाली करने के लिए सालभर की मोहलत दे दी।

खण्डपीठ ने कहा कि यह सुविदित है कि दुकानें और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां सामान्यत: भूतल पर ही संचालित की जाती हैं ताकि उपभोक्ता आसानी से वहां पहुंच सके लेकिन इसके बावजूद अदालत मकान मालिक को यह निर्देश नहीं दे सकती है कि वह अपनी व्यावसायिक गतिविधियां किस तल पर संचालित करे। यह तय करने का हक पूरी तरह मकान मालिक को है। हालांकि खण्डपीठ ने किरायेदार नवीन माहेश्वरी को विवादित कमरे/तल को खाली करने के लिए सालभर की मोहलत दे दी।

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16 thoughts on “अदालत, मकान मालिक को निर्देश नहीं दे सकती है कि वह मकान का कैसा इस्तेमाल करे”

  1. यह तो मालिक को स्वतंत्रता है कि वह अपने मकान का विधिअनुसार उपयोग करे। इस में अदालत को दखल का अधिकार नहीं है। यह सुप्रीमकोर्ट का पुराना विनिश्चय है।

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  2. ye to makan malik ka adhikar hai magar maine suna hai ki jab tak makan malik ko koi khas jaroorat na ho tab tak wo kirayedar se dukan khali nhi karwa sakta……..koi na koi genuine reason hona jaroori hai.

    vaise uprokt nirnay mein ek baat gaur karne wali hai ki agar makan malik ko wo hissa apne kisi khas upyog ke liye bahut jaldi chahiye ho to wo to ek saal ke liye latak gaya aur is beech mein yadi koi aur kanoon aa gaya to bechara makan malik to phir fans jayega na……..aise nyay ka kya fayada jo samay par na mil sake.

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  3. माकन मालिक अपनी पूरी जिंदगी की कमाई अपनी माकन में लगता है. और किराये दार उसमे अपना कब्ज़ा जमा लेता है , अपने ही माकन को वापस लेंने के लिए वो कोर्ट कचइरी में जा जा केर अपनी ज़िंदगी खत्म केर लेता है. वाह रे मेरे हिंदुस्तान का कानून , मेरी गुजारिश है उन तमाम न्याय अधिकारियो से . की वो माकन मालिको पैर रहम करे ……..रहम . रहम. रहम

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    1. माकन मालिक मनमाने ढंग से किराया वसूलते है. एक ही साल में १०% से भी ज्यादा किराया बढ़ा देते हैं, यदि किराएदार सके लिए तैयार नहीं है की वो दस प्रतिशत से ज्यादा किराया बढ़ा सके तो मकानमालिक कहता है माकन खली कर दो. अरे हर साल १० प्रतिशत तो सैलरी भी नहीं बढ़ती फिर किरायेदार १० प्रतिशत से ज्यादा किराया कहाँ से बढ़ा देगा, माकनमालिक मनमाने ढंग से किराया वसूलते हैं, मेरी तमाम न्याय अधिकारीयों से अपील है की वो किरायेदार पर भी रहम करें और कोई अच्छा कानून बनाएं, रहम रहम रहम

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      1. माकन मालिक मनमाने ढंग से किराया वसूलते है किराये की दर makan ke size ke hisabse hona chahiye , किराये की दर makan ke area ke hisabase bhi hona chahiye , किराये की दर flore ke hisabse bhi hona chahiye , keeraya time par or one month ke ten daya tak ki mohlat hini chahiye ,मेरी तमाम न्याय अधिकारीयों से अपील है की वो किरायेदार पर भी रहम करें और कोई अच्छा कानून बनाएं, रहम रहम रहम

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  4. अदालत मकान मालिक को निर्देश नही दे सकती लेकिन कोई कानून तो बना सकती हे जिसेसे की किराये दारो को सहूलीयत हो सके मतलब की माकन की साइज के हिसाबसे तो किराया ले आज हर माकन मालिक अपनी नौकरी/व्वसाय से ज्यादा सिर्फ माकन का किराया वसूल रहा हे जितनी एक मजदूर की महीने भर्त की मजदूरी नही होती हे उसका ५०% तो माकन मालिक लेते हे और गरीब को सर छुपाने के लिए वह देना पड़ता हे ऐसा क्यों एक गरीब हमेसा गरीब होता जा रहा हे और पैसा वाला अमीर , कंही न कंही तो एक माकन मालिक भी इसकी मूल बजह हे , क्या मोदी सरकार कभी गरीबी मीता पाएगी कभी नहीं क्यों की जब तक छोटी – छोटी आम जरूरतों पर नजर नही डालेंगे तब तक कोई सरकार गरीबी नही मिटा सकती हे इसी लिए ऐसा कानून होना जरूरी हे जो एक किराए दार को सही किराया देने में uske हक़ में हो, मेरी अपील हे भारत्त के संविधान से के अभी की स्थति देखते हुए कुछ न कुछ करे……………धन्यवाद युवराज सिंह कुशवाह (सत्य मेव जयते )

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  5. कानून इंसानो के लिए बना हे कानून के लिए इंसान नही ,
    अपना जबाब देने के पहले सोचिये आप भी एक इंसान हे ,

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  6. कॉल करे ९०३९४५६६९० पर तब हम आपसे बात करेंगे की ऐसा क्यों ………..

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  7. रेंट कण्ट्रोल ऑफिसर ने आदेश मेवर्णित किया की प्रकरण मारे क्षेत्राधिकार साई परे है भरा निंत्रक अधिकारी सागर मध्य प्रदेश ५ा/९०-१२-१३ काया करो किर्यादार माकन खली नहीं कर रहा सम्पति छावनी मे स्थित है चैंट एक्ट मे काया PRAWDHAN है माकन खली करने के काया मे मां Nहानि एंड सिवल एविक्शन सूत लगसक्ता हो साथ मे ंजक BHI

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  8. कैंट एक्ट २००६ मई काया प्रावधान है माकन KHALI करने हेतु प्रॉपर्टी इस इन ंप.

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  9. Hm jis makan me rhte h 25-30 saal ho gya
    Pr ab makan malik ne bech diya h
    Bs 1month ka time diya h mera room kahi abhi manage nhi ho paya h
    Uske liye koi upay h ki 2-4mahine ruke vo jo makan kharid liya h

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  10. एक साल रेंट नहीं दिहे .क्या करे.कोई लेता नहीं.

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    1. ३५ Sal se rhte ह.kya kare koe rent nhi let a.pas ka aadmii जोर करता ह.yh ek trusty makan h.

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    2. हमे कानून ी shayatta चाहिए क्या kre

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  11. Ager makan malik ne pagdi ke roop me moti rakam le hai. to ab kion lalch aa gia dukan ka. us samye dukan kharidne dete hi nahi thhe.kehty thhe kiraya sathh lenge.
    Achhi tarhen yad hai.
    Markit ke hisab se piese bhi pure lia thhe. per kiraya sathh chahie thha.
    Malik ke pass -1 bulding thhi. 6-7 bulding bna li.
    Kiray se. Tab inka yeh vaypar thha.
    Aj SARKAR bhi nahi samjh rahi.
    Kanun banana hai to baraber ka banao.
    Ya to value ka adha 50% dilwa do.
    Lalchi Makan malik to free mai dukan chahta hai.dukan bechety waket 80-90% Rupee lia thhe v kiraya her mahine lia.
    Bhagwan sabakav hisab rakhata hai.
    Hamne bhi khun pasine ki kamai se dukan kharidi thhi.17 sal pehele.

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  12. बिना इनफार्मेशन दिए कोई मकन मालिक एक दम रूम खली एक दो दिन में ही कैसे करा सकता है इसके लियउस वो सिर्फ शक के करण तो इसके लिए कोई अधिकार है क्या वो भी लड़कियों से खाली करने क लिए.

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