रोक लगाए जाने के बावजूद स्मारकों का निर्माण जारी रखने पर जमकर फटकार

सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाए जाने के बावजूद स्मारकों का निर्माण करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार को जमकर फटकारते हुए चेतावनी दी है कि वह अन्य दलों की तरह अदालत के साथ राजनीति नहीं करे। शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि स्मारकों पर निर्माण कार्य रोकने के इसके आदेश के उल्लंघन से लगता है कि इसका निर्देश उच्चस्थ पद से दिया गया है। अदालत ने राज्य सरकार की ओर से पेश वकील हरीश साल्वे से कहा, आप मुझे बताएं कि आपको किसने उल्लंघन के निर्देश दिए हैं? निश्चित रूप से किसी ऐरे-गैरे ने यह निर्देश नहीं दिया होगा। इसके लिए उच्च पदस्थ किसी अधिकारी ने ही निर्देश दिया होगा।

जस्टिस बीएन अग्रवाल तथा आफताब आलम की पीठ ने राज्य सरकार की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे से कहा, आप वैसी राजनीति नहीं कर सकते जैसी आप विधानसभा में अन्य राजनीतिक दलों के साथ करते हैं। पीठ ने यह दलील भी खारिज कर दी कि इस मामले में कुछ भ्रम की स्थिति है तथा उसके आदेश का उल्लंघन नहीं हुआ है। खंडपीठ ने कहा, हमने गहरी पीड़ा के साथ आपका हलफनामा पढ़ा है। इसमें सच्चाई का अभाव है। यह महज बहानेबाजी है। यदि किसी प्रकार का भ्रम है तो राज्य सरकार का कर्तव्य है कि वह जरूरी स्पष्टीकरण के लिए अदालत के पास आए।

शीर्ष कोर्ट ने ये टिप्पणियां बहुजन समाज पार्टी संस्थापक कांशीराम तथा अन्य दलित नेताओं के स्मारक बनाने में होने वाले 2,600 करोड़ रुपए के खर्च की वैधता संबंधी मामले की सुनवाई के दौरान की। अपने आदेश के उल्लंघन पर गंभीर रुख अपनाते हुए शीर्ष अदालत ने याद दिलाया कि लोकतंत्र और अल्पमत एक साथ नहीं रह सकते क्योंकि संविधान सर्वोपरि है और अदालती आदेश का पालन किया जाना चाहिए।

आरोप लगाया गया है कि शीर्ष कोर्ट में 8 सितंबर को हलफनामा देने के बावजूद उत्तरप्रदेश सरकार उसका उल्लंघन करते हुए स्मारकों में निर्माण कार्य चला रही है। अदालत ने कहा कि इस मामले में आप लापरवाह रहे। कोई भी जिम्मेदार सरकार काम रोक चुकी होती। आपने हमें संदेह के नजरिये से देखने के लिए मजबूर कर दिया है।

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One thought on “रोक लगाए जाने के बावजूद स्मारकों का निर्माण जारी रखने पर जमकर फटकार”

  1. बेशर्म नेतावो के लिए "फटकारा" शब्द अब शायद कम प्रभावशाली रह गया , कोई और शब्द इसकी जगह इस्तेमाल होना चाहिए !

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