पीड़िता द्वारा तेजाब की खुली बिक्री पर पाबंदी की माँग: राज्य सरकारें सहमत नहीं

युवतियों पर तेजाब फेंकने की बढ़ती वारदातों के बीच सुप्रीम कोर्ट ने 30 सितम्बर को तेजाब की खुली बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग खारिज कर दी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कई राज्य सरकारों ने इस पर आपत्ति जताई है, लिहाजा यह संभव नहीं है। मामले की सुनवाई कर रही मुख्य न्यायाधीश के.जी. बालाकृष्णन की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि तेजाब की खुली बिक्री पर पाबंदी संभव नहीं है। राज्य सरकारों की विभिन्न राय के चलते इसकी सीमित और अनुमति के आधार पर बिक्री हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट तेजाब हमले की पीड़ित दिल्ली की नाबालिग लड़की लक्ष्मी की ओर से 2006 में दायर याचिका पर सुनवाई कर रही है। तेजाब हमले में लक्ष्मी का चेहरा और शरीर के अन्य हिस्से बुरी तरह झुलस गए थे।

पीठ ने तेजाब बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग करने वाली लक्ष्मी की वकील से कहा, ‘यह राज्यों के अधिकार क्षेत्र का मामला है। जब तक राज्य सरकारें सहयोग नहीं करतीं तब तक ज्यादा कुछ नहीं किया जा सकता।’ इससे पहले मामले में सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सालीसिटर जनरल मोहन पारासरन ने अदालत को बताया था कि तेजाब की खुली बिक्री पर पूर्ण पाबंदी के विचार से राज्य सरकारें सहमत नहीं हैं।
पिछले तीन साल से तेजाब की खुली बिक्री पर पूर्ण पाबंदी के लिए दबाव बना रहीं लक्ष्मी की वकील अपर्णा भट ने आरोप लगाया कि केंद्र ने तेजाब हमलों की बढ़ती घटनाएं रोकने के लिए कुछ नहीं किया। भट ने कहा कि अब इस मामले में राज्य सरकारें रोड़े अटका रही हैं जबकि पिछले चार महीने में ही तेजाब हमले की कई वारदातें सामने आ चुकी हैं। भट ने कहा कि वह तेजाब की औद्योगिक इस्तेमाल के लिए बिक्री के खिलाफ नहीं हैं लेकिन इसकी खुली बिक्री बंद होनी चाहिए।
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