उत्तर प्रदेश में स्मारक निर्माण जारी रहा तो निर्माण स्थल पर केंद्रीय सैनिक बलों की तैनाती होगी

सुप्रीम कोर्ट ने लखनऊ में मूर्तियों तथा स्मारकों के निर्माण कार्य को रोकने सम्बंधी शीर्ष अदालत के बार-बार दिए गए निर्देशों का “घोर” उल्लंघन करने को लेकर 6 अक्तूबर को उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव के खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि यदि निर्माण कार्य लगातार जारी रहा तो निर्माणस्थलों पर केन्द्रीय बलों को तैनात किया जा सकता हैन्यायाधीश बीएन अग्रवाल और न्यायाधीश आफताब आलम की पीठ ने एक बार तो यहां तक विचार कर डाला कि निर्माण कार्य नहीं रूकने पर क्या मुख्य सचिव को जेल भेजा जा सकता है। पीठ ने कहा, हम इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि हमारे आदेशों का घोर उल्लंघन हुआ है। यदि आपने अभी भी हमारे आदेशों का उल्लंघन किया तो केन्द्रीय बलों को तैनात करने के लिए मामला केन्द्र के हाथ चला जाएगा।

कोर्ट ने मुख्य सचिव अतुल कुमार को नोटिस जारी करते हुए जानना चाहा कि अदालत के आदेश की अवहेलना के लिए क्यों न उनके खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्रवाई की जाए। सुप्रीम कोर्ट ने उनसे चार नवम्बर को अदालत में पेश होने को भी कहा। सुप्रीम कोर्ट ने 5 अक्तूबर को इस मामले में राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई थी और कहा था कि वह अदालत के साथ राजनीति न खेले। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 2600 करोड़ रूपए की लागत से निर्मित हो रहे स्मारकों पर निर्माण कार्य रोकने के उसके आदेश की अवहेलना से ऎसा लगता है किबहुत ऊंचे स्तरसे मिले निर्देशों के कारण की गई है। पीठ ने कहा, उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव तथा अन्य द्वारा दाखिल हलफनामे और सम्बंघित पक्षों के वकीलों को सुनने के बाद, यह प्रथम दृष्टया अदालत की अवमानना की कार्रवाई शुरू किए जाने का मामला बनता है।

पीठ ने कोर्ट की रजिस्ट्री को इस मामले में अदालत की अवमानना याचिका दाखिल करने का निर्देश दिया। पीठ ने सॉलीसिटर जनरल गोपाल सुब्रह्मण्यम को इस मामले में पेश होने और सहायक के तौर पर मदद करने को भी कहा। केन्द्रीय बलों को नियुक्त करने के सम्बंध में कोर्ट की टिप्पणी याचिकाकर्ता मिथिलेश कुमार की अपील के संदर्भ में आई। याचिकाकर्ता ने कहा था कि स्थानीय पुलिस निष्पक्ष तरीके से कार्रवाई नहीं कर सकती। पीठ ने यह भी कहा कि यदि हमारे आदेशों का बार-बार उल्लंघन किया जाता है तो हम मुख्य सचिव को जेल भेज सकते हैं। पीठ ने कहा कि उसका भावी निर्माण कार्य पर रोक लगाने सम्बंधी 11 सितंबर का अंतरिम आदेश जारी रहेगा।

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