13 वर्षों से कातिल होने का लांछन सहते हुए जेल में: 20 लाख मुआवजा

पंजाब के पांच लोगों ने पूरे 13 साल तक एक ऐसे आदमी के कत्ल की सजा भुगती जो आज भी जिंदा है। इस हैरान कर देने वाले सच के पात्र हैं बरनाला के नछतर सिंह, उनके पुत्र सीरा सिंह, निक्का सिंह, अमरजीत सिंह और सुरजीत सिंह। इन्हें 1996 में पुलिस ने बरनाला के ही जगसीर सिंह के कत्ल के आरोप में गिरफ्तार किया था। पुलिस ने कत्ल के बाद लाश और कत्ल में इस्तेमाल हुए खून से सने दो हथियार, इन पांचों का इकबालिया बयान बतौर सबूत अदालत में पेश किया।

1998 में निचली अदालत ने जगसीर सिंह की हत्या के आरोप में इन पांचों को उम्र कैद की सजा सुना दी। नछतर सिंह का बेटा सीरा सिंह जेल की जिल्लत बर्दाश्त नहीं कर पाया और उसने 2003 में जेल में ही खुदकुशी कर ली लेकिन पिछले साल यानि गिरफ्तारी के 12 साल बाद ये पता चला की जिस आदमी के कत्ल की सजा ये पांचों भुगत रहे थे वो तो जिंदा है।

दरअसल पिछले साल दिसम्बर में लुधियाना पुलिस में किसी ने एक FIR दर्ज कराई कि 1996 में मारा गया जगसीर सिंह जिंदा है। पुलिस ने जगसीर सिंह की तलाश की तो वो मिल भी गया। वो अपने घर से दूर रोपड़ में एक मोटर गैराज में मैकेनिक का काम कर रहा था। पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया और इसी के साथ खुल गया बरनाला पुलिस की कारगुजारी का कच्चा चिट्ठा।

13 सालों से सरकारी कागजात में लाश बन चुके जगसीर सिंह के सामने आने के बाद पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने इस केस के जांच अधिकारियों ASI दर्शन सिंह और SI सरबजीत राय को सीधे तौर पर बेगुनाहों को फंसाने का आरोपी माना और इन पर मामला दर्ज करने का आदेश दिया। इसके अलावा जगसीर के कत्ल के मामले के शिकायतकर्ता उसके पिता, सुखदेव सिंह और पांच गवाहों के खिलाफ भी मामला दर्ज करने का आदेश दिया गया। 13 सालों तक कातिल होने की तोहमत झेलने और जेल में रहते हुए आर्थिक और मानसिक नुकसान की भरपाई के लिए अदालत ने पांचों आरोपियों को बीसबीस लाख रुपये यानि कुल 1 करोड़ रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है।

अदालत ने अपने आदेश में साफ कहा कि ये सुनिश्चित करना सरकार की ज़िम्मेदारी है कि गुनहगारों को सजा मिले, न कि बेगुनाहों को । इस मामले में पुलिस की कारगुजारी की वजह से पांच बेगुनाहों को जबरदस्त तकलीफों का सामना करना पड़ा है। पंजाब सरकार तीस दिनों के अंदर हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के पास मुआवजे की एक करोड़ रुपए की राशि जमा करवाए।

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4 thoughts on “13 वर्षों से कातिल होने का लांछन सहते हुए जेल में: 20 लाख मुआवजा”

  1. इस फैसले को देखने के लिए मैं पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की साइट देखने गया तो लोड ही नहीं हो रही थी।

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  2. इसीलिए तो कहते हैं कि कानून अंधा होता है.

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  3. जिस व्यक्ति ने खुदखुशी की उसका क्या..? अब सच में जरुरत है की इस देश में पुलिसिंग के कानून में तब्दीलिया और सुधर होना बहोत जरुर्री है किसीभी पुलिस अफसर की नोकरी किसी भी निर्दोष या दोषी व्यक्ति की जान किसी से बढ़कर नहीं है इस विषय में न्याय तभी माना जा सकता है जब कानून का दुरूपयोग करने वालो पर सख्त से सख्त कार्य वाही हो जो मानव अधिकारों और देश के संविधान की रक्षा में बेहद जरुरी है …वन्देमातरम

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