श्रम विवाद मामलों में आवश्यक रूप से श्रमिक संगठनों के पक्ष को सुना जाए

उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि श्रम विवाद मामलों में फैसला सुनाये जाने से पहले अदालतों में आवश्यक रूप से पीड़ित श्रमिकों या मजदूर संगठनों के पक्ष को सुना जाना चाहिए अन्यथा यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का उल्लंघन होगा। उच्चतम न्यायालय में न्यायमूर्ति मार्कण्डेय काटजु और न्यायमूर्ति अशोक कुमार गांगुली की पीठ ने कहा कि श्रम कानून का उद्देश्य श्रमिकों को सुविधा प्रदान करना है। इसलिए सामान्य तौर पर श्रम कानून के तहत सभी मामलों में श्रमिकों या कम से कम उनका प्रतिनिधित्व करने वालों या मजदूर संगठनों को एक पक्ष बनाया जाना चाहिए। उच्चतम न्यायालय ने त्रावणकोर स्थित कर्मचारी राज्य बीमा (ईएसआई) अदालत को कुछ मजदूरों का पक्ष सुनने का निर्देश दिया जिन्हें फर्टिलाइजर केमिकल त्रावणकोर लिमिटेड ने चिकित्सा बीमा सुविधा प्रदान करने से इंकार कर दिया था ताकि इस योजना के तहत श्रमिक की योग्यता तय की जा सके।

इस मामले में ईएसआई अदालत ने विवाद पर कोई निर्णय जारी नहीं किया था और केरल उच्च न्यायालय ने कंपनी से श्रमिक को ईएसआई सुविधा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था। यह श्रमिक गोदाम में सामान ढोने का काम करते थे। हालांकि मामले की सुनवाई के दौरान न तो ईएसआई अदालत और न ही उच्च न्यायालय ने पीड़ित श्रमिकों की जांच परख की।
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One thought on “श्रम विवाद मामलों में आवश्यक रूप से श्रमिक संगठनों के पक्ष को सुना जाए”

  1. बहुत महत्वपूर्ण निर्णय है, पढ़ना पड़ेगा।

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