शिक्षकों के 17 साल से बकाया वेतन भुगतान में नाकामी; मंत्रियों, विधायकों के खर्चों की जाँच होगी: सुप्रीम कोर्ट

पैसे की कमी की दलील देकर पार्टटाइम शिक्षकों के बकाए वेतन के भुगतान में आनाकानी करने पर सुप्रीम कोर्ट ने केरल सरकार की जमकर खिंचाई की है। राज्य सरकार की दलीलों को खारिज करते हुए कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर वह पार्ट टाइम शिक्षकों की 17 साल के बकाए वेतन का भुगतान करने में नाकाम रहती है तो मंत्रियों और विधायकों पर होने वाले खर्च की समीक्षा की जाएगी। जस्टिस बी. एन. अग्रवाल और जस्टिस जी. एस. संघवी की बेंच ने हल्के-फुलके अंदाज में राज्य सरकार के वकील से पूछा कि आपके मुख्यमंत्री किस क्लास में यात्रा करते हैं, इकॉनमी या बिजनस? बेंच की यह टिप्पणी केंद्र सरकार द्वारा अपने मंत्रियों को दिए गए खर्च कटौती संबंधी सुझाव के मद्देनजर थी।

कोर्ट ने सख्त लहजे में राज्य सरकार के वकील से कहा कि हम आपके दावों से सहमत नहीं हो सकते। अगर आप 30 सितंबर तक आदेश की तामील नहीं करते तो हम आपके मंत्रियों और विधायकों पर होने वाले खर्च की समीक्षा करेंगे। बेंच ने यह टिप्पणी सहायता प्राप्त सेकेंडरी टीचर असोसिएशन की स्पेशल लीव पिटिशन (SLP) पर की, जिसमें पार्टटाइम टीचरों के बकाए का भुगतान करने में सरकार की आनाकानी को चुनौती दी गई है। बहस के दौरान, राज्य सरकार ने कहा था कि वित्तीय कड़की के कारण वह 19 अगस्त 2008 को जारी सरकार के आदेश का पालन नहीं कर पा रही है। यह आदेश पार्ट टाइम शिक्षकों को बकाया के भुगतान से जुड़ा था। यह बकाया 1992 के बाद से दिया जाना था।

इससे पहले केरल हाई कोर्ट ने भी परेशान शिक्षकों की ओर से दाखिल कई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सरकार को एरियर के भुगतान की बात कही थी। यहां तक कि राज्य सरकार ने हाई कोर्ट के आदेश की तामील करते हुए 10 फरवरी 2004 को बकाया के भुगतान का आदेश भी जारी किया था। इसके बाद भी बकाया का भुगतान ना होने पर पीड़ित शिक्षक, सुप्रीम कोर्ट गए।

अदालत ने 7 जुलाई को कहा था कि अगर बकाया का भुगतान नहीं किया गया तो चीफ सेक्रटरी के खिलाफ वॉरंट जारी किया जाएगा। इसी चेतावनी के बाद राज्य सरकार ने 19 अगस्त को एक और आदेश जारी कर एरियर देने का आदेश दिया पर शिक्षकों तक तब भी पैसा नहीं पहुंच पाया।
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