राजस्थान की नगर पालिकाओं में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण में अवरोध

राजस्थान हाई कोर्ट ने उस क़ानूनी संशोधन पर रोक लगा दी है जिसमें सरकार ने हाल में महिलाओं के लिए पालिका संस्थाओं में आरक्षण की ये व्यवस्था की थी। हाई कोर्ट ने 17 सितम्बर को ये रोक तब लगाई जब सीकर के मोहम्मद कलीम ने इसे चुनौती दी और कहा कि नई व्यवस्था से पालिका संस्थाओं में आरक्षण की सीमा बढ़ कर 50 से बहुत ज़्यादा हो गई है। ऐसा करना सुप्रीम कोर्ट के इंदिरा साहनी मामले में दिए गए निर्णय का उल्लंघन होगा। हाई कोर्ट ने क़ानून में किए गए इस संशोधन पर रोक लगा दी और सरकार से जवाब तलब किया है।

राज्य सरकार ने हाल ही में 1959 के नगर पालिका कानून में बदलाव कर महिलाओं के लिए इन संस्थाओ में 50 प्रतिशत की व्यवस्था कर दी थी जबकि पहले महज 33 प्रतिशत आरक्षण था। याचिकाकर्ता के वकील अनूप ढढ ने हाई कोर्ट में कहा कि नए प्रावधानों से आरक्षण बढ़ कर कोई 90 फ़ीसदी तक जा पहुँचा है। इससे सुप्रीम कोर्ट के फैसले की अवहेलना हुई है। अनूप ढढ ने मीडिया को बताया कि नए प्रावधानों से आरक्षण की सीमा बहुत ज़्यादा बढ़ गई है क्योंकि सरकार ने इसके साथ युवा वर्ग के लिए भी 20 फ़ीसदी का प्रस्ताव किया है। अनूप ढढ का कहना था कि ये सारे प्रावधान जोड़ें तो ये 90 फ़ीसदी से भी ज़्यादा हो जाते हैं।

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