बलात्कार के मामले में पीड़िता के बयान झूठे पाए गए तो मामला खारिज

उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि बलात्कार के मामले में हालांकि पीड़िता के बयान को तवज्जो देना चाहिए लेकिन अगर आरोप अनुपयुक्त और तर्क को झुठलाते हुए पाए गए तो इसे खारिज भी किया जा सकता है। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि यह सही है कि बलात्कार के कुछ मामलों में पीड़िता के बयान को तवज्जो दी जानी चाहिए लेकिन इस बीच अगर ऐसा लगे कि बात तर्क से परे और असंभाव्य है तो इसके बाद भी इसे सबूत के तौर पर स्वीकार किया जाना उस सिद्धांत के खिलाफ होगा जिसके तहत आपराधिक मामले में बयान को साक्ष्य की तरह स्वीकार किया जाता है।

उच्चतम न्यायालय में न्यायमूर्ति एस एस बेदी और न्यायमूर्ति अफताब आलम की पीठ ने तमीजुद्दीन को बरी करते हुए यह टिप्पणी की। तमीजुद्दीन को 28 सितंबर 1985 में एक महिला से बलात्कार के मामले में सात वर्ष की सजा सुनाई गई थी और दिल्ली उच्च न्यायालय ने उसके दोष की पुष्टि की थी।
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