बच्चे ने बेढ़गी पोशाक पहनी, स्कूल ने निलंबित किया, पिता मीडिया में पहुँचा, हाई कोर्ट ने मामला सुलझाया

दिल्ली उच्च न्यायालय ने आज मध्यस्थ की भूमिका निभाते हुए छात्र और स्कूल प्रबंधन के बीच के पहनावे संबंधी एक विवाद को निपटाया और दोनों को संयम बरतने तथा छोटे छोटे मुद्दों को अदालत तक नहीं घसीटने की सलाह दी। माऊंट कार्मेल स्कूल ने एक छात्र को अश्लील कपडे पहनने के आरोप में विद्यालय से पहले महीने भर निलंबित किया गया था और जब उसके अभिभावक ने बच्चे के इस बर्ताव के लिए माफी मांगने कि बजाय मीडिया में जाकर बखेडा खडा किया तो फिर उसे अनिश्चित काल के लिए निलंबित कर दिया गया ।छात्र पर आरोप है कि वह ऐसा अंगवस्त्र पहनकर स्कूल गया था जो कमर से उपर दिखाई पडता था। स्कूल प्रशासन ने ऐसे पहनावे पर रोक लगा रखी थी।

न्यायमूर्ति मुकुल मुदगल और न्यायमूर्ति रेवा खेत्रपाल की खंडपीठ ने दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाई और स्कूल को छात्र के प्रति ज्यादा सख्त नहीं होने की सलाह दी। न्यायालय ने छात्र के पिता को सलाह दी कि वह तिल का ताड न बनाएं और ऐसे मामलों में संयम बरतें। अब वह छात्र 14 सितंबर से स्कूल जाने लगेगा।छात्र के पिता ने सख्त रुख अपनाने के लिए माफी मांगी और आश्वासन दिया कि भविष्य में ऐसा नहीं होगा।

सामाजिक कार्यकर्ता और वकील अशोक अग्रवाल ने कहा कि दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम 1973 के नियम 37 के अनुसार 16 वर्ष से कम आयु के किसी भी छात्र पर न तो जुर्माना लगाया जा सकता है और न ही उसे स्कूल से निकाला जा सकता है।
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2 thoughts on “बच्चे ने बेढ़गी पोशाक पहनी, स्कूल ने निलंबित किया, पिता मीडिया में पहुँचा, हाई कोर्ट ने मामला सुलझाया”

  1. जिन बाल अधिकारों के नाम पर हम अपने बच्चो को मनमानी करने की छूट दे रहें हैं और उनके दोषों पर पर्दा दाल रहें है दरअसल वह अधिकार केवल उच्चवर्गीय और कमोबेश मध्यमवर्गीय बच्चों को ही सुलभ है. जिनके हितों की रक्षा हेतु यह अधिनियम बनाया गया था वह आज भी स्वयं को इसकी छत्रछाया से दूर ही पाते है. कहने का अर्थ यह है कि हम अघाये को ही भोजन परोस रहें हैं. ऐसे में अपच होना लाजमी ही है. विद्यालय के पूर्वघोषित नियम को तोड़कर बालक ने अनुशासन हीनता का ही परिचय दिया था परन्तु उसके पिता ने जिस प्रकार बालक का पक्ष लेते हुए इस पर बखेडा खडा किया वह उससे भी ज्यादा निंदनीय है. संतान से मोह अच्छी बात है परन्तु धृतराष्ट्र या गांधारी बन जाना कतई उचित नहीं.

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  2. बच्चों को दंडित नही करना चाहिए इस का अर्थ यह भी नहीं कि उन्हें उद्दंड होने देना चाहिए।

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