जनहित याचिका ने जसवंत सिंह की किताब से प्रतिबंध हटवाया

गुजरात हाई कोर्ट ने भारतीय जनता पार्टी के पूर्व नेता जसवंत सिंह की किताब पर लगी पाबंदी हटा दी है. इसके साथ ही राज्य में किताब बिकने का रास्ता साफ़ हो गया है। राज्य सरकार ने इस किताब पर पाबंदी लगाई थी।
गुजरात हाई कोर्ट ने सरकार के आदेश को दरकिनार करते हुए कहा कि अधिकारियों ने जो अधिसूचना जारी की है, वह क़ानूनी लिहाज़ से किताब पर पाबंदी लगाने के लिए काफ़ी नहीं है। जसवंत ने यह किताब ‘जिन्ना-इंडियाः पार्टीशन, इंडीपेंडेंस’ पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना पर लिखी है। गुजरात सरकार ने 19 अगस्त को संविधान की धारा 95 के तहत एक अधिसूचना जारी कर इस किताब पर राज्य में प्रतिबंध लगाया था। अधिसूचना में कहा गया कि किताब राष्ट्रहित के ख़िलाफ़ और गुमराह करने वाली है।

अपना फ़ैसला सुनाते हुए गुजरात हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि पाबंदी नागरिकों के बुनियादी अधिकार पर कड़ा हमला था। तीन सदस्यों वाली बेंच की अध्यक्षता चीफ़ जस्टिस केएस राधाकृष्णन ने की. अदालत ने कहा कि अगर राज्य सरकार चाहे तो नई अधिसूचना ला सकती है, उस पर कोई रोक नहीं है।

गुजरात हाई कोर्ट का यह फ़ैसला एक जनहित याचिका पर आया है। वैसे ख़ुद जसवंत सिंह भी किताब पर पाबंदी के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटा चुके हैं। अदालत के फ़ैसले पर जसवंत सिंह ने ख़ुशी जताते हुए कहा कि यह न्याय की जीत है। लेकिन उन्होंने कहा कि यह ऐसा मुद्दा ही नहीं था, जिसके लिए अदालत जाना पड़ता।
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One thought on “जनहित याचिका ने जसवंत सिंह की किताब से प्रतिबंध हटवाया”

  1. अच्छा हुआ । न्यायोचित भी यही था ।

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