जजों को प्रशिक्षण की ज़रूरत: पूर्व न्यायाधीश

राजस्थान हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश पानाचंद जैन ने कहा है कि जजों को भी प्रशिक्षण की जरूरत है। कई मामले केवल तकनीकी कारणों से ही लंबित हैं। धोखाधड़ी के मामले में जज दो घंटे की बहस सुनते हैं, इससे अन्य महत्वपूर्ण मामलों का नंबर सुनवाई के लिए नहीं आता और उनकी सुनवाई टल जाती है। इससे न्याय प्रक्रिया लंबित होती है। वे शनिवार को एकेडमी फॉर सोशियो-लीगल स्टडीज की ओर से राजस्थान समग्र सेवा संघ परिसर में न्याय का अधिकार एवं न्यायपालिका की जवाबदेही विषय पर हुई परिचर्चा में बोल रहे थे।

उन्होंने कहा कि अधिकतर मामले जमानत के होते हैं। विधि आयोग ने कई सुझाव दिए हैं, लेकिन सरकार ने इन्हें लागू करने की बजाय रद्दी की टोकरी में डाल दिया। पूर्व न्यायाधीश शिवकुमार शर्मा ने कहा कि केस को डिस्पोजल इन डिफॉल्ट करने की प्रक्रिया पर पांबदी लगाने की जरूरत है। कई बार जज मामले को स्वीकार कर ड्यू कोर्स में डाल देते हैं। इससे तकनीकी कारणों से सुनवाई में अनावश्यक देरी होती है। हाई कोर्ट में मामलों में तारीख भी दें जिससे सुनवाई तय तिथि को हो सके और पक्षकारों को दशकों तक सुनवाई के लिए इंतजार नहीं करना पड़े।
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2 thoughts on “जजों को प्रशिक्षण की ज़रूरत: पूर्व न्यायाधीश”

  1. दोनों अपने जमाने के नामी वकील रहे हैं और प्रतिष्ठित जज भी। दोनों के सुझाव महत्वपूर्ण हैं।

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