छुट्टियाँ कम, काम ज़्यादा करे सुप्रीम कोर्ट: विधि आयोग

सुप्रीम कोर्ट के जज भले ही सुप्रीम कोर्ट की नई बेंच (पीठ) स्थापित करने के विरुद्ध हों, लेकिन भारतीय विधि आयोग का इस मामले में दूसरा मत है। वह एक नहीं बल्कि उत्तर, दक्षिण, पूरब और पश्चिम में सुप्रीम कोर्ट की चार बेंच स्थापित करने के पक्ष में है। आयोग ने यह भी कहा है कि मुकदमों के बढ़ते बोझ के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट को अपनी छुट्टियां 10 से 15 दिन तक घटा देनी चाहिए और आधा घंटा ज्यादा काम करना चाहिए।

उच्च न्याय पालिका में जरूरत से ज्यादा छुट्टियों पर अब तक वकील संगठन और अन्य गैर-सरकारी संगठन ही उंगलियां उठाते आए हैं, लेकिन यह पहला मौका है जब विधि आयोग ने ही सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट की छुट्टियों को बहुत ज्यादा माना है। यदि सभी अवकाशों को जोड़ दिया जाए तो सुप्रीम कोर्ट आम तौर पर छह माह बंद रहता है और छह माह खुलता है। हाईकोर्ट में भी कमोबेश यही स्थिति है।

अकेले सुप्रीम कोर्ट में लगभग 50 हजार मामले लंबित हैं। विधि मंत्री को सौंपी अपनी 229 और 230वीं रिपोर्ट में आयोग के अध्यक्ष जस्टिस ए.आर. लक्ष्मणन और सदस्य सचिव बी.ए. अग्रवाल ने कहा है कि जजों को तय समय के अंदर फैसले दे देने चाहिएं। आयोग ने ये सिफारिशें सुप्रीम कोर्ट के कार्यरत जज जस्टिस ए.के. गांगुली की सलाह के आधार पर की हैं। आयोग की सिफारिश है कि जज समय का पूरा इस्तेमाल करें और फैसले बिल्कुल स्पष्ट लिखें ताकि वे आगे मुकदमेबाजी को जन्म न दें। बहस की अवधि को भी कम करें। यदि जरूरत न हो तो इसे डेढ़ घंटे में समाप्त करवाएं।

VN:F [1.9.22_1171]
Rating: 0.0/10 (0 votes cast)
Print Friendly, PDF & Email

2 thoughts on “छुट्टियाँ कम, काम ज़्यादा करे सुप्रीम कोर्ट: विधि आयोग”

  1. सुप्रीम कोर्ट में अवकाश कम करना ठीक नहीं है। ऐसा करना ही है तो जजों की संख्या और बढ़ानी पड़ेगी। रिलीवर जज रखने होंगे। आखिर जजों को अदालत में बैठने के अलावा केस स्टड़ी भी करनी होती है। फैसले लिखाने होते हैं। इस का समय कहाँ से निकाला जाएगा। ताजा तरीन बनाए रखने के लिए लगातार पढ़ना भी पड़ता है और विभिन्न विचारविमर्श के कार्यक्रमों में भी हिस्सा लेना पड़ता है। यदि यह जरूरी नहीं समझा जाए तो फिर भारतीय निर्णयों का दुनिया में जो सम्मान है वह जल्दी ही नष्ट भी होने वाला है।

    VA:F [1.9.22_1171]
    Rating: 0 (from 0 votes)
  2. मैं दिनेश जी के विचारो से सौ प्रतिशत सहमत हूँ।

    VA:F [1.9.22_1171]
    Rating: 0 (from 0 votes)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *


Enable Google Transliteration.(To type in English, press Ctrl+g)