कैदियों को समलैंगिकता से बचाने के लिए पत्नियों से एकांत में मिलने दिए जाने के आदेश

एक अपील की सुनवाई के बाद यह आदेश  आया है, जिसमें कहा गया है कि क़ैदियों को उनकी पत्नियों से मिलने पर लगी रोक की वजह से ही जेलों में समलैंगिक संबंध और नशीली दवाओं की लत बढ़ी है. इससे बचने के लिए जेलों में बंद क़ैदियों को उनकी पत्नियों से मिलने का और ज्यादा अधिकार मिलना चाहिए. इस आदेश को देने वाली पाकिस्तान की शरई अदालत ने कहा है कि “जेलों में क़ैदियों की पत्नी और उनके परिवारवालों से मिलने के लिए उचित इंतज़ाम नहीं हैं. हम जेलों को यह आदेश देते हैं, कि वहाँ परिवार के लोगों से एकांत में मिलने की सुविधाएँ उपलब्ध करवाई जाएँ.”

अदालत ने कहा कि पत्नी से एकांत में मिलने की सुविधा के अभाव में ही राष्ट्रीय जेलों में क़ैदी समलैंगिकता और दंगा-फ़साद जैसी अनैतिक गतिविधियों में लिप्त हो जाया करते हैं. अदालत ने कहा कि ऐसी सुविधा हर क़ैदी का इस्लामिक और मानवीय अधिकार है. शरई अदालत ने अधिकारियों को यह निर्देश भी दिए कि अंतरराष्ट्रीय जेल व्यवस्था का अध्ययन करके वो यह तय करे कि पाकिस्तान की जेलों में क्या सुधार लाया जा सकता है.
अदालत ने यह भी कहा कि जिन कैदियों के व्यवहार में सुधार आया है, उन्हें उनकी पत्नी और परिवारवालों से मिलने की सुविधा दी जाए. साथ ही “मुक्त कारावास” की दिशा में भी प्रयास किया जाना चाहिए.

मानवाधिकार संगठन काफी समय से यह शिकायत करते रहे हैं कि पाकिस्तान की जेलों के संचालन में कमियाँ हैं और जेल अधिकारी कैदियों को अक्सर मारते पीटते रहते हैं. इसके अलावा जेल की जिन कोठरियों में सिर्फ छह कैदियों के रहने की जगह है, वहाँ बारह बारह कैदी भर दिए जाते हैं.

VN:F [1.9.22_1171]
Rating: 0.0/10 (0 votes cast)
Print Friendly, PDF & Email

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *


Enable Google Transliteration.(To type in English, press Ctrl+g)