सुप्रीम कोर्ट में जजों की नियुक्ति में हो रही देरी बर्दाश्त नहीं

सुप्रीम कोर्ट में लम्बित मुकदमों की संख्या 50,000 से ऊपर बहुत पहले ही जा चुकी है। सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान न्यायाधीशों पर काम का बहुत बोझा है।  अब सुप्रीमकोर्ट सरकार की ओर से हो रही देरी बर्दाश्त नहीं कर सकती और नए जजों की नियुक्ति के लिए चयन की प्रक्रिया आरंभ कर रही है।  यह बात भारत के मुख्य न्यायाधीश के जी बालाकृष्णन ने सरकार को कही है।  सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 25 से बढ़ा कर 30 करने की स्वीकृति प्राप्त हुए छह माह से ऊपर हो चुके हैं लेकिन सरकार की ढिलाई के कारण देरी हो रही है।

सुप्रीमकोर्ट ने सरकार को पाँच आवास सुप्रीम कोर्ट के नए न्यायाधीशों के लिए सु्प्रीम कोर्ट को हस्तांतरित करने के लिए कहा था। लेकिन सरकार का उत्तर था कि अभी तक वे ऐसा नहीं कर पाए हैं क्यों कि आवश्यक स्तर के आवास रिक्त नहीं हैं।  मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि देश की सर्वोच्च अदालत की स्थिति काम के बोझ से और बदतर हो जाए यह बर्दाश्त नहीं किया जा सकता और वे न्यायाधीशों की नियुक्ति प्रक्रिया आरंभ कर रहे हैं।  उन्होंने कहा कि संविधान में आवश्यक संशोधन की प्रक्रिया में वर्ष भर लगा। इस बीच सरकार के पास आवास की व्यवस्था करने को बहुत समय था, लेकिन सरकार ने उस का उपयोग नहीं किया।

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