सरबजीत सिंह की मौत की सजा के खिलाफ दया याचिका पर सुनवाई स्थगित

पाकिस्तानी सर्वोच्च न्यायालय ने भारतीय कैदी सरबजीत सिंह की मौत की सजा के खिलाफ दया याचिका पर सुनवाई 24 जून तक स्थगित कर दी है। उसे पाकिस्तान में बम विस्फोट के आरोप में मौत की सजा दी गई है। मामले की सुनवाई कर रही न्यायाधीश फैयाज अहमद, कायम जान खान और जब्बार हुसैन जाफरी की पीठ ने 22 जून को न्यायालय के समक्ष पेश होने में विफल रहे सिंह के वकील को भी नोटिस जारी किया।

नौ मार्च 2006 को सर्वोच्च न्यायालय के दो न्यायाधीशों की पीठ ने वर्ष 1990 में लाहौर में चार बम विस्फोटों में 14 लोगों की मौत के मामले में उसकी सजा के खिलाफ की गई अपील को ठुकरा दिया था। यदि सर्वोच्च न्यायालय उसकी याचिका को ठुकरा देता है तो सरबजीत के पास राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के पास याचिका देने का विकल्प उपलब्ध होगा।

सरबजीत की मौत की सजा वर्ष 1991 में उसके दोषी घोषित किए जाने के बाद से ही लगातार टलती रही है। उसके परिवार के सदस्यों का कहना है कि सरबजीत नशे की हालत में पाकिस्तानी सीमा में घुस गया और पकड़ा गया। वह निर्दोष है। सरबजीत को एक अप्रैल 2008 को फांसी दी जानी थी लेकिन नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी की इस मामले की जांच कराने की इच्छा जताने के कारण अधिकारियों ने इसे टाल दिया था।

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