एक अच्छा वकील कुछ ही मिनटों में उतना कमा सकता है जितना एक न्यायाधीश पूरे महीने में पाते हैं

न्यायपालिका प्रतिभावान लोगों को आकर्षित नहीं कर पाता क्योंकि एक अच्छा वकील कुछ ही मिनटों में उतना कमा सकता है जितना एक न्यायाधीश पूरे महीने में पाते हैं। अगर यह स्थिति पूर्ण अदालत की है तो फिर न्यायाधिकरण व दूसरे अर्ध न्यायिक निकाय की दुर्दशा और भी ज्यादा है। हाल तक एक राष्ट्रीय अपील न्यायाधिकरण एक कार से अपने काम को अंजाम दे रहा था।

बिज़नेस स्टैण्डर्ड में एम जे एंटोनी का एक बेहद दिलचस्प विश्लेषण बताता है कि कई न्यायाधिकरणों के पास बुनियादी ढांचे की कमी है। ये कई जगहों पर सिर्फ सुबह के कुछ घंटे ही काम करते हैं। राज्य सरकार भी इन्हें आधारभूत सुविधाएं मुहैया कराने में दिलचस्पी नहीं लेती। केंद्र सरकार के साथ-साथ राज्य का बजट भी न्यायपालिका के साथ फटेहाल जैसा व्यवहार करता है।

न्यायिक प्रणाली चरमराने का खतरा बताते हुए एम जे एंटोनी इसी विश्लेषण में आगे लिखते हैं कि न्यायाधीशों की कमी के अलावा फंड की कमी भी प्रणाली में दरार की मुख्य वजह है। पूर्व न्यायाधीश ने कहा था – मौजूदा परिस्थिति में हरेक उच्च न्यायालय और न्यायिक व्यवस्था फंड का भूखा है। इस देश में न्यायपालिका पर सकल राष्ट्रीय उत्पाद (जीएनपी) का सिर्फ 0.2 फीसदी खर्च होता है जबकि ब्रिटेन में यह 4.3 फीसदी है। अपने कुल खर्च का आधा से ज्यादा हिस्सा न्यायपालिका अदालती शुल्क व जुर्माने से मिली रकम से पूरी करता है।

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2 thoughts on “एक अच्छा वकील कुछ ही मिनटों में उतना कमा सकता है जितना एक न्यायाधीश पूरे महीने में पाते हैं”

  1. महत्वपूर्ण समाचार!

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  2. वास्तविकता से परिचित करवाने के लिए शुक्रिया।

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