अदालत ब्लॉग के हुए 2000 पोस्ट, विराम पर हो रहा विचार

इकलौते व्यक्ति द्वारालिखेजा रहेअदालतब्लॉग ने आज 2000 पोस्ट का आंकडा छू लिया है। यह 2000 पोस्ट्स भी मात्र 19 महीनों के भीतर पूरी हुईं हैं।

वस्तुत: इसे लेखन न कह कर संकलन कहना ज़्यादा उचित होगा। फिर भी विभिन्न संचार माध्यमों से एक ख़ास विषय की सूचनायों को एकत्र करना, विभिन्न भाषायों के शब्दों को हिन्दी में अनुवाद कर सामने लाना, ज़रूरी लिंक लगाना, विषय अनुरूप चित्र संलग्न करना, संपादित करना, समय पर प्रकाशित करना सामाजिक-पारिवारिक-आजीविका के दायित्वों के बीच काफी दुरूह कार्य है। वह भी एक ही व्यक्ति द्वारा।

लेकिन यह सम्भव हो पाया है एक जुनून के कारण।

peace अहिन्दी भाषी माने जाने के बावजूद, मैंने कभी यह दावा नहीं किया कि मैं हिन्दी की सेवा कर रहा हूँ, प्रचारप्रसार में लगा हूँ या हिन्दी को नयी ऊँचाइयों पर ले जाने का इरादा है। ऐसे कैसे कह सकता हूँ, जब कि मैं तो रोजाना नई-नई चीजें सीखता हूँ।

बस, हिन्दी मुझे अच्छी लगती है और जो चीज मुझे अच्छी लगती है उसे जतनपूर्वक संभाले रखना अपनी जिम्मेदारी समझता हूँ। इतनी बार मैंका उल्लेख जानबूझ कर किया गया है, क्योंकि हाल ही में कथित हिन्दी प्रेमियों के अपशब्दों को झेला है, मैंने।

इस बार कुछ अधिक नहीं लिखूंगा। फिर भी अदालत का इतिहास देखा जाए तो पिछले वर्ष 2008 की दीपावली के अवसर पर 1000 मुकद्दमों का जश्न मनाया था और उससे 4 महीने पहले ही तो 500 पोस्ट की खुशी जाहिर की थी। अदालत की प्रथम पोस्ट, प्रथम टिप्पणी, ब्लॉग जगत में प्रथम उल्लेख और 500 वीं पोस्ट की खुशी, पहली वर्षगाँठ , एक वर्ष में 1200 पोस्ट की बातें, याद की जानी चाहिये।

tepuktangan इस अंतराल में आप सभी की सराहना, टिप्पणियाँ, शाबाशी, मार्गदर्शन, मांग, आलोचना और धमकी ने मेरे लिए उत्प्रेरक का कार्य किया है। जिसके चलते कुछ और बेहतर करने की ऊर्जा बनी रहती है।

इसके अलावा मैं, उन तमाम ब्लॉगर्स/ चिट्ठाकारों/ एग्रीगेटर्स/ वेबसाईट्स को धन्यवाद देता हूँ, जिन्होंने ‘अदालत’ का उल्लेख किया या लिंक लगायी या पसंद किया।

समस्त टिप्पणीकर्तायों को, संजीवनी रूपी टिप्पणियों के लिए तो धन्यवाद शब्द नाकाफी होगा। किसी भी कार्य के मूल ऊर्जा स्त्रोत/ जनक को भूलना नादानी मानी जायेगी। विभिन्न व्यक्तियों, संस्थायों, समाचार-पत्रों, वेबसाईट्स का आभारी हूँ, जिनकी मूल खबरों/ जानकारियों की बदौलत यह ब्लॉग इस पड़ाव पर पहुँच सका है।

adacall कई ब्लॉगर साथियों ने मुझसे शिकायत की है कि आपका फोन नम्बर, चित्र, सम्पर्क सूत्र नहीं है कहीं, मुलाकात कैसे की जाये या पहचाना कैसे जाये? उनसे जो कुछ कहा, वही दोहराता हूँ कि अपने स्वभाव के कारण मुझे अपनी प्रशंसा से बहुत संकोच है और आत्मप्रचार भी अटपटा लगता है।

कुछ चुनिंदा महिला-पुरूष ब्लॉगर, जिन्हें मैं अपने निकट महसूस करता हूँ, उन्हें मैंने स्वयं परिचय दिया है और तकरीबन सभी से मेरा दैनिक संवाद है।

मुझे लगता है कि इस पोस्ट पर आत्मप्रचार काफी हो चुका। kenyit

ब्लॉगजगत के साथियों का कुछ उल्लेख तो आप मेरी इस पोस्ट पर भी देख सकते हैं।

इंटरनेट की दुनिया पर अदालत की लोकप्रियता के बारे में बहुत कुछ लिखने की इच्छा थी, किन्तु पोस्ट बड़ी हो जाने का भय है। फिर कभी सही। बस एक बात कहीं कचोटती है कि दैनंदिन कार्यों से जुड़े अदालत के फैसलों पर गैरविधिक क्षेत्र के ब्लॉगर साथियों की टिप्पणियाँ लगभग हैं ही नहीं। इसका प्रमाण है इन 2000 विधिक जानकारियों पर मात्र 1243 टिप्पणियाँ! इससे क्या अर्थ निकलता है आप जानें gatai

आप सभी का स्नेह मिला, स्वस्थ आलोचना मिली, उत्साहवर्धन मिला। जिसके चलते आज यह अदालत के 2000 पोस्ट है। आप सभी आगुन्तकों, टिप्पणीकर्तायों का धन्यवाद। अंत में यही कहना चाहता हूँ कि अब कुछ विराम दिया जा रहा है इस अदालत ब्लॉग को। यह विराम, एक अर्ध विराम ही है लगभग एक माह का। इस अंतराल में अपनी ऊर्जा को ब्लॉग जगत में ही लगाया जायेगा किसी और विषय विशेष पर। तब तक दीजिये इजाजत। babai

लोकेश

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12 thoughts on “अदालत ब्लॉग के हुए 2000 पोस्ट, विराम पर हो रहा विचार”

  1. 2000 पोस्‍ट पूरे करने की बहुत बहुत बधाई .. पर अचानक विराम लेना क्‍यों आवश्‍यक पड गया ?

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  2. 2000वीं पोस्ट पर बहुत बहुत बधाई!
    मुझे तो लगता है आप ने एवरेस्ट पर चढ़ कर वहाँ हिन्दी ब्लाग जगत का ध्वज फहरा दिया है।
    मैं अदालत को विराम देने के पक्ष में नहीं हूँ। लेकिन कभी कभी कभी विराम भी आवश्यक हो जाता है। नए रूप के लिए, नए संयोजनों, के लिए नए परिणामों के लिए।
    जब भी लौटेगा अदालत एक नया रंग, रूप, सज्जा और नयी सूचनाएँ लेकर लौटेगा। बहुत बहुत शुभकामनाएँ।

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  3. अदालत ब्‍लॉग की पोस्‍टों पर विराम लगने से बेहतर और सुखद वो होता यदि अपराधों पर विराम लग गया होता। ऐसी स्थिति होगी नहीं पर हो तो महासुखद होगी।
    पर इनका संयोजन अन्‍य अदालती निर्णयों में सहायक बनेगा, संदर्भ के तौर पर उल्लिखित किया जाएगा – सही अर्थों में लोकेश यानी लोक और ईश का समागम बनेगा। ऐसी कामना है। शुभकामना है। मनोहर भावना है।

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  4. आदरनीय लोकेश भाई …
    सादर नमस्कार .आज इस ब्लॉगजगत में लगभग दस हजार ब्लोग्गर तो हैं ही ..मगर आप जैसे कुछ ही हैं तो ब्लॉग्गिंग को एक मिशन की तरह लेकर ..एक विशिष्ट सोच और दिशा में लेकर जा रहे हैं…ये सबके बस की बात नहीं होती की लगातार एक दिन में कई कई बार अदालती हलचलों से सबको रूबरू कराते रहना..ये आपकी प्रतिबद्धता ही है ..जो आज इस ब्लॉग को इस मुकाम तक ले आयी है..हम तो कामना करते हैं की एक दिन इस ब्लॉग पर पोस्टों की संख्या लाख के पार पहुंचे और हम इसी तरह बधाई दें.

    जहां तक विराम की बात है..इसमें कोई शक नहीं की इसकी एक दिन की अनुपस्थिति भी हम जैसे आदतन यहाँ झाँकने वालों को निश्चित रूप से खलेगी..मगर लम्बे सफ़र में कुछ पडावों का होना भी जरूरी हो जता है..हो सकता है की ये विश्राम आपको इस ब्लॉग के लिए ..हिंदी ब्लॉग्गिंग के लिए कुछ और नए क्रांतिकारी प्रयोगों के लिए समय मिलने जैसा साबित हो…

    हमारी शुभकामनायें..और हाँ ठीक एक महीने बाद हम फिर झाँकने आयेंगे..उम्मीद है अदालत का ये ग्रीष्मकालीन अवकाश पूरा हो चुका होगा…

    आपको और इस ब्लॉग की विशिष्टता को एक बार पुनः बधाई…

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  5. बधाइयाँ लोकेश जी ..अपशब्दों की ओर देखने से पहले एक बार हम जैसे प्रसंशकों की ओर जरुर देख लीजियेगा.

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  6. अरे ग्रेट लोकेश जी! बधाई। आपका ब्लॉग तो एक फिनॉमिना है!

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  7. आदरणीय लोकेश जी आपके इस अनूठे और अद्वितीय प्रयास के लिए ढेरो शुभकामनोएं। आपके द्वारा अनवरत रूप से जो सूचनाएं संकलित कर ‘अदालत’ के माध्यम से हम सभी तक पहुँचाई गयी है, वह केवल और केवल प्रशंषनीय कहा जा सकता है। लेकिन आपके द्वारा इतना लम्बा विराम निश्चित रूप से खलेगा। लेकिन आशा ही नहीं अपितु पूर्ण विश्वास है कि इस अल्प विराम के बाद अदालत और निखरेगी।

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  8. इतनी बड़ी उपलब्धि के लिए बधाई शब्द छोटा पड़ रहा है। टिप्पणी न देने का कारण अपना अज्ञान जग जाहिर करने की अनिच्छा भी हो सकती है।
    घुघूती बासूती

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  9. बधाई! अपनी उपयोगिता को टिप्पणियों से न नापें। आप विराम से लौट कर आयें आपका इंतजार कुछ लोग तो कर ही रहे हैं।

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  10. इस जरूरी ब्लॉग का सतत चलते रहना बहुत जरूरी है।

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  11. लोकेश भाई 2000वीं पोस्‍ट पर बहुत-बहुत बधाई। कानूनी मसलों को आम लोगों के पक्ष में खड़े होकर सरल भाषा में पहुंचाने की वजह से यह ब्‍लॉग बहुत महत्‍वपूर्ण काम कर रहा है। इस पक्षधरता के साथ कानूनी नुक्‍तों को समझाने वाली सामग्री शायद नेट पर कहीं नहीं है। इसके पीछे लगे आपके निहित श्रम का अंदाजा लगा सकता हूं। विराम के बाद वापसी की प्रतीक्षा रहेगी।
    अभिवादन सहित,
    आपका साथी कपिल

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  12. वाह वाह, बधाई बधाई, घुघुती जी सही कह रही हैं, एक बार कहने से बधाई शब्द छोटा पड़ रहा है। अदालत के हम भी नियमित पाठक हैं, हां टिप्पणी क्या दें समझ नहीं आता, इस लिए चुप रहते हैं, आप नये विषय पर लिखने जा रहे हैं, हमें पूरा यकींन है कि वो विषय भी ऐसी ही सफ़लता हासिल करेगा, क्युं कि विषय जितना महत्त्व रखता है उतना ही महत्त्व इस बात का है कि कौन लिख रहा है।

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