अदालती भ्रष्टाचार का एक और सनसनीखेज मामला

अदालती भ्रष्टाचार के एक और सनसनीखेज मामले में पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट के तीन जजों समेत निचली अदालतों के एक जज पर पंजाब पुलिस का विजिलेंस ब्यूरो उंगलियां उठा रहा है। एक साल पहले विजिलेंस ब्यूरो ने अपनी रिपोर्ट न्यायपालिका को सौंप दी थी, लेकिन अब तक कोई कदम नहीं उठाया गया है। 17 अप्रैल 2008 को शक के आधार पर पंजाब पुलिस के विजिलेंस ब्यूरो ने दो लोगों के फोन टेप करने शुरू किए। इन दोनों पर शक था कि ये राज्य की सुरक्षा के लिए खतरा हैं और संगठित अपराध में शामिल हैं। जैसे ही फोन टेप होने शुरू हुए, पंजाब पुलिस के अधिकारियों के होश उड़ गए। दोनों के फोन पर कई लोगों से बातचीत हुई, जिनमें निचली अदालत के जज भी शामिल थे। यही नहीं, पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के दो जजों के बारे में भी बातचीत हुई। बातचीत ना सिर्फ जजों के तबादले, तरक्की बल्कि रिश्वत के लेन-देन तक पहुंची।

मामला जजों से जुड़ा था लिहाजा पुलिस अधिकारियों को समझ नहीं आ रहा था कि किया क्या जाए। आखिरकार विजिलेंस ब्यूरो ने ये रिपोर्ट पंजाब के एडवोकेट जनरल एच.एस. मट्टेवाल को सौंप दी। मट्टेवाल ने अगले ही दिन वो रिपोर्ट तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश विजेंद्र जैन को सौंप दी। इसके बाद एक-एक कर छह रिपोर्ट्स एडवोकेट जनरल मट्टेवाल के जरिए जस्टिस विजेंद्र जैन तक पहुंचीं। मामला जजों से जुड़ा था लिहाजा जस्टिस विजेंद्र जैन ने ये रिपोर्ट देश के मुख्य न्यायाधीश तक पहुंचा दी। इनमें एक नाम हाईकोर्ट के जज महताब सिंह गिल का था। जैन ने गिल के तबादले की सिफारिश भी कर दी। लेकिन एक साल हो गए ना तो किसी का तबादला हुआ, ना रिपोर्ट पर किसी तरह की जांच शुरू हुई।

पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट के जज महताब सिंह गिल पहले भी विवादों में रहे हैं। 2002 में पंजाब पब्लिक सर्विस कमिशन घोटाले में भी उन पर आरोप लगे थे। इस घोटाले की जांच के बाद पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट के तत्कालीन चीफ जस्टिस बी.एन. सहारिया ने प्रशासनिक कार्यों में दखल देने का आरोप लगाया था। फिलहाल तो पंजाब विजिलेंस ब्यूरो के हाथ बंधे हुए हैं। रिपोर्ट पर न्यायपालिका से किसी तरह का निर्देश नहीं मिल रहा लिहाजा उसकी जांच आगे नहीं बढ़ पा रही।
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3 thoughts on “अदालती भ्रष्टाचार का एक और सनसनीखेज मामला”

  1. अच्छी खबर! लेकिन बुरी खबर!
    अच्छी इसलिए कि न्यायपालिका का भ्रष्टाचार मटके से चूने लगा दिखाई देने लगा है।
    बुरी इसलिए कि इतनी बड़ी बात होते हुए भी अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हो रही है। जब कि त्वरित कार्यवाही होनी चाहिए थी। भ्रष्टाचार को संरक्षण मिल रहा है।
    समूची व्यवस्था कोढ़ ग्रस्त है इस की चिकित्सा संभव नहीं है। व्यवस्था बदलनी होगी। उसे बदलने का काम सिर्फ जनता ही कर सकती है। जनता जब चेतेगी तब चेतेगी। हम सिर्फ चेतना जगाने का काम कर सकते हैं।

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  2. कब जागेगे हम !! बहुत ही खराब बात इस मै जितने भी लिग लिप्त थे सभी को सजा झटपट होनी चाहिये र्थी, क्या यही है भारत का कानून, एक छोटे से चोर को जो बच्चो का पेट भरने के लिये चोरी करे उस के खानादान कॊ पीटो, ओर इन बडे चोरो को सलाम करो.लानत है

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  3. इस देश में आम आदमी के लिए आज न्यापालिका ही एकमात्र आधार रहा है जहाँ उसे ‘न्याय’ मिलने की आशा रहती है। जो न्यायपालिका स्वयं के तंत्र में फैले भ्रष्टाचार को मिटाने में इतनी असहाय है उससे आम आदमी कितनी अपेक्षा रखे ये सोचने का प्रश्न है।

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