20 वर्ष बाद 25 रूपये की रिश्वतखोरी के आरोप से सुप्रीम कोर्ट ने मुक्त किया

बीस वर्ष पहले 25 रुपए की रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार केरल के कर्मचारी सुबैर को सुप्रीम कोर्ट ने आरोप मुक्त कर दिया है। सुबैर आरटीओ में पदस्थ था। उसे अप्रैल 1989 में मुनाफ से 25 रु. की रिश्वत लेने का आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

शीर्ष कोर्ट की जस्टिस वीएस सिरपुरकर व आरएम लोढा की वेकेशन बेंच ने अभियोजन पक्ष द्वारा पेश सबूतों को ठोस नहीं मानते हुए सजा कायम रखने के लिए इन्हें अपर्याप्त बताया। दैनिक भास्कर में राकेश भटनागर की रिपोर्ट है कि तिरुअनंतपुरम की स्थानीय कोर्ट ने सुबैर को दोषी ठहराते हुए छह माह की सजा सुनाई थी। बाद में हाईकोर्ट ने भी इस सजा को बरकरार रखा था। लेकिन दोनों कोर्ट में मामले की सुनवाई में 15 वर्ष गुजर गए। सुबैर ने न्याय के लिए 2004 में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष गुहार लगाई थी।

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2 thoughts on “20 वर्ष बाद 25 रूपये की रिश्वतखोरी के आरोप से सुप्रीम कोर्ट ने मुक्त किया”

  1. अब Green Ply का क्या होगा जिसका घोष वाक्य ही है ….सालों साल चलता रहे….चलता रहे 🙂

    कल शायद एक नया विज्ञापन बने क्लोरोमिंट की तर्ज पर ……

    भईया लोग अदालत क्यूँ जाते हैं …..और तब सामने वाला बाल्टी भर पानी में पूछनेवाले का सिर डुबाकर कहेगा ……दुबारा मत पूछना 🙂

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  2. लगता है ज्यादा समय व्यतीत हो जाने पर अदालते भी प्रभावित होती है। वैसे भी इतने समय तक ट्रायल को भुगतना भी सजा ही है। लेकिन निर्णय अनुकरणीय नहीं है। जब हमारे देश में छोटी-मोटी रिश्वतखोरी को वैसे ही मान्यता मिली हुई है। तो ऐसे लोगो का सजा से बच जाना रिश्वतखोरो को और उत्साहित करने वाला है।

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