वकीलों और डाक्टरों में हुया पथराव, पुलिस ने किया लाठीचार्ज

इलाहाबाद कलेक्ट्रेट के सामने 2 मई को उस समय हंगामा खड़ा हो गया जब वहां से गुजर रहे एक नर्सिग होम के डाक्टरों-कर्मचारियों के जुलूस और वकीलों के बीच झड़प हो गयी। थोड़ी ही देर में इस झड़प ने उग्र रूप ले लिया और फिर दोनों ओर से पत्थर चलने लगे। मामला बढ़ता देख पुलिस ने भी मोर्चा संभाला और लाठियां भांज कर किसी तरह स्थिति पर काबू पाया। थोड़ी ही देर में कलेक्ट्रेट के आसपास सन्नाटा पसर गया और भारी संख्या में बल तैनात कर दिया गया। इस बवाल में करीब आधा दर्जन वकील व डाक्टर घायल हो गए और एक दर्जन लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया।

उल्लेखनीय है कि वकील लक्ष्मीकांत मिश्र की कीडगंज स्थित एक नर्सिग होम में इलाज के दौरान सप्ताह भर पहले मौत हो गई थी। तब वकीलों ने यह आरोप लगाकर बवाल कर दिया था कि डाक्टर की लापरवाही के कारण वकील की मौत हुई है। इसी को लेकर वकील लामबंद हो गए। उधर, वकीलों के लगातार दबाव बनाने से डाक्टरों ने भी आर-पार की लड़ाई की चेतावनी दे दी। एक रणनीति के तहत डाक्टरों ने 2 मई को जुलूस निकालने का निर्णय लिया। इसी क्रम में नर्सिग होम के जूनियर डाक्टरों और पैरा मेडिकल स्टाफ ने कीडगंज से जुलूस निकाला। यह जुलूस मेडिकल कालेज चौराहे से होता हुआ कलेक्ट्रेट पहुंच गया। इसमें शामिल कुछ डाक्टरों ने काला कोट मुर्दाबाद का नारा लगाना शुरू कर दिया। इस पर वकीलों का गुस्सा भड़क उठा और पत्थरबाजी शुरू कर दी। देखते ही देखते डाक्टरों ने भी मोर्चा संभाल लिया। संख्या में वकील कुछ ज्यादा थे और वे डाक्टरों पर पिल पड़े। मार-पीट कलेक्ट्रेट परिसर तक पहुंच गयी। वहा कर्मचारियों को भी उनके गुस्से का शिकार होना पड़ा। वहां एहतियात के तौर पर पहले से तैनात बल ने वकीलों पर धावा बोल दिया। 
इसकी जानकारी मिलते ही डीएम राजीव अग्रवाल और डीआईजी बीपी त्रिपाठी मौके पर पहुंच गए। दोनों अधिकारियों ने खुद हाथों में लाठियां संभाल लीं और वकीलों को दौड़ा लिया। प्रशासन के आक्रामक रवैये को देख वकीलों के पैर उखड़ गए। कुछ ही देर बाद मोर्चा संभाले वकीलों ने मैदान छोड़ भागना शुरू कर दिया। इस दौरान जो भी वकील सामने पड़ा, उस पर जमकर लाठियां चटकीं। आसपास के दुकानों पर बैठे लोगों में भगदड़ मच गई। पुलिस ने सभी दुकानों को बंद करा दिया। इस दौरान करीब दर्जन भर लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया। इस दौरान नर्सिग होम के कुछ कर्मचारी मामूली रूप से घायल हो गए थे। उन्हें एक नर्सिग होम में भर्ती कराया गया। 
वकीलों और डाक्टरों की लड़ाई में कुछ अराजक तत्व भी शामिल बताये गये। उन्होंने नर्सिग होम की महिलाओं की चेन छीन ली और भाग निकले। महिलायें चिल्लाती रह गईं लेकिन उस दौरान लोगों को कुछ सुनायी ही नहीं दिया।
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One thought on “वकीलों और डाक्टरों में हुया पथराव, पुलिस ने किया लाठीचार्ज”

  1. वकील और डाक्टर दोनों ही जिन चीजों के लिए लड़ना चाहिए उन्हें छोड़ कर बिलकुल व्यक्तिगत लड़ाइयों पर उतर आए हैं। उस का नतीजा यह तो होना ङी था। ये दोनों सुविधाभोगी वर्ग हैं। जनता की जेब से पैसा निकाल कर अपनी आजीविका चलाते चलाते वे भूल जाते हैं कि वे किस नोबुल प्रोफेशन से आते हैं। उन की सामूहिक लड़ाइयाँ भी वैयक्तिक मद्दों को ले कर है। वे सामुहिक मुद्दों को बिलकुल विस्मृत कर गए हैं। यह सारा प्रभाव इस बात का है कि ये समुदाय जिस जनता पर आश्रित हैं उस की जेब में इन्हें भुगतान करने को पैसा नही है। इनका संघर्ष तो यह होना चाहिए कि किस तरह जनता खुशहाल हो जिस से इन के व्यवसाय भी फले फूलें।
    पता नहीं यह अहसास इन दोनों वर्गों को कब होगा?

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