बर्खास्त सिपाहियों के मामले में पुलिस महानिदेशक को हलफनामे के साथ हाजिर होने का निर्देश

उत्तर प्रदेश उच्च न्यायालय ने बर्खास्त सिपाहियों के मामले में दाखिल अवमानना याचिका पर पुलिस महानिदेशक विक्रम सिंह को हलफनामे के साथ 20 मई को हाजिर होने का निर्देश दिया है और सरकार द्वारा निर्णय का अनुपालन करने अथवा अपील दाखिल करने के बाबत स्थिति स्पष्ट न करने पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है। न्यायालय ने प्रमुख सचिव गृह मंजीत सिंह अपर पुलिस महानिदेशक इलाहाबाद शीतला प्रसाद श्रीवास्तव, पुलिस महानिरीक्षक स्थापना लखनऊ विजय सिंह व उपमहानिरीक्षक पुलिस स्थापना इलाहाबाद संजय एम. तर्डे को भी अवमानना नोटिस जारी की है और याचिका पर जवाब मांगा है।

यह आदेश न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने पवन कुमार सिंह की अवमानना याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है। न्यायालय ने 8 अप्रैल 09 के आदेश से पुलिस महानिदेशक को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। किन्तु जवाबी हलफनामा न दाखिल कर सरकार ने चुनाव के चलते असमर्थता व्यक्त करते हुए और समय मांगा। इसे न्यायालय ने स्वीकार करते हुए सरकार के अपर महाधिवक्ता सतीश चतुर्वेदी को 10 दिन का समय दिया है। याची की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता आरएन सिंह व वीके सिंह ने बहस की कि न्यायालय ने सिपाहियों की बर्खास्तगी आदेश को रद कर दिया। फलस्वरूप सभी बर्खास्तगी से पूर्व की स्थिति में बहाल हो गये। ऐसे में उन्हें वेतन पाने का हक है। सरकार की अपील खारिज होने के बाद सभी को कार्यभार सौंप देना चाहिए। सरकार की तरफ से तर्क दिया गया कि अपील पर न्यायालय ने सरकार को कमेटी बनाकर दागी को अलग करने की छूट दी है। किन्तु सरकार ने अभी इस बारे में निर्णय नहीं लिया है न्यायालय ने कहा कि निर्णय के खिलाफ सरकार ने तुरन्त अपील की और अब एसएलपी में देरी हो रही है। निर्णय पर रोक नहीं है। अनुपालन किया जाना चाहिए।
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