न्यायाधीशों की संपत्ति से जुड़ी निजी जानकारी का खुलासा करने से न्यायिक व्यवस्था की स्वतंत्रता प्रभावित होगी!

उच्चतम न्यायालय ने कहा कि न्यायाधीशों की संपत्ति से जुड़ी निजी जानकारी का खुलासा करने से न्यायिक व्यवस्था की स्वतंत्रता प्रभावित होगी। मुख्य सूचना आयुक्त ने गत छह जनवरी को एक आदेश में उच्चतम न्यायालय को निर्देश दिए थे कि वह प्रधान न्यायाधीश के समक्ष घोषित की गई न्यायाधीशों की संपत्ति से जुड़ी जानकारी का खुलासा करें। मुख्य सूचना आयुक्त के इस आदेश को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत ने दिल्ली उच्च न्यायालय के समक्ष यह दलील दी।

उच्चतम न्यायालय की रजिस्ट्री की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल गुलाम ई वाहनवती ने कहा, ‘अगर हम न्यायाधीश के कामकाज को प्रभावित करने की हद तक पारदर्शिता लाएंगे तो इससे न्यायिक व्यवस्था की स्वतंत्रता पर असर पड़ेगा।’ उन्होंने कहा, ‘पारदर्शिता कानून के तहत सार्वजनिक प्राधिकरण के पास मौजूद सभी जानकारी का खुलासा नहीं किया जा सकता और सिर्फ उसी जानकारी का खुलासा वह (सार्वजनिक प्राधिकार) कर सकता है जिस पर नियंत्रण का उसे अधिकार है।

वाहनवती ने कहा उसे (सार्वजनिक प्राधिकार को) न सिर्फ जानकारी रखनी चाहिए बल्कि उसे उस जानकारी को नियंत्रित भी करना चाहिए और इसका यह अर्थ है कि वह ऐसी जानकारी की मांग कर सकता है। प्रधान न्यायाधीश के समक्ष न्यायाधीशों के संपत्ति की घोषणा करने का मामला गैर-वैधानिक और गैर-बाध्यकारी है तथा प्रधान न्यायाधीश का उस पर नियंत्रण नहीं है।
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2 thoughts on “न्यायाधीशों की संपत्ति से जुड़ी निजी जानकारी का खुलासा करने से न्यायिक व्यवस्था की स्वतंत्रता प्रभावित होगी!”

  1. उन की बात पर यकीन ह,ै पर उन्हें यह तो सार्वजनिक करना ही चाहिए कि न्यायाधीश की संपत्ति सार्वजनिक करने से किस तरह न्याय प्रभावित हो सकता है।

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  2. दुवेदी दादा आप तो अच्छी तरह से जानते है कि गोपनीयता ख़तम होने पर रुतवा और रौनक भी तो ख़तम होगा न लोग इनकी कमाई पर भी सक करने लगेंगे और इस मामले को उतना या बोलना भी गलत है कोई कि ध्यान भी उधर जाता है

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