गुजरात दंगों की सुनवाई, गुजरात में ही होगी

सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात दंगों के मामले में एक अहम फैसला सुनाते हुए दंगों की सुनवाई गुजरात में ही कराने के आदेश दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) संगठन की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें वर्ष 2002 के गुजरात दंगों की सुनवाई राज्य से बाहर कराने की अपील की थी। अदालत ने साफ तौर पर कहा है कि गुजरात दंगों की सुनवाई राज्य में ही होगी। सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात दंगों की सुनवाई के लिए छह जिलों अहमदाबाद, आनंद, गुलबर्ग, गोधरा, मेहसाणा और साबरकांठा में फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने के निर्देश दिए हैं और कहा है कि विशेष अदालतों में प्रतिदिन दंगों से जुडे मामलों की सुनवाई की जाएगी। इसके साथ ही अदालत ने कहा है कि गुजरात दंगों से संबंधित मामलों की सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट खुद सरकारी वकील नियुक्त करेगा। वहीं, दंगों की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) के अध्यक्ष आर. के राघवन दंगों की सुनवाई की प्रक्रिया पर नजर रखेंगे और इस मामले में हर तीन माह में सुप्रीम कोर्ट को रिपोर्ट देंगे।

वहीं, गवाहों की सुरक्षा पर उठ रहे सवालों के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यदि जरूरत पडी तो सुनवाई के दौरान गवाहों के राज्य के बाहर रहने की व्यवस्था की जाएगी। अदालत ने गवाहों और पीडितों को भरोसा दिलाया है कि उनकी सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाएगा। 

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2002 में गोधरा कांड के बाद गुजरात में सांप्रदायिक हिंसा फैल गई थी। गुजरात दंगों के मामले में कई मंत्री, नेता और बडे अधिकारी आरोपी बनाए गए हैं। एसआईटी गुजरात दंगों से जुडे जिन 14 मामलों की जांच कर रही है, उन सभी की सुनवाई अब फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराई जाएगी।
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