अवैध वैवाहिक संबंधों में भी दहेज विरोधी कानून लागू होंगे

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि दहेज या किसी अन्य वजह से किसी महिला को प्रताड़ित करने पर पुरुष आपराधिक अभियोग से नहीं बच सकता। अदालत का कहना है कि यह दलील बेमानी होगी कि पुरुष की उस महिला से कानूनी रूप से शादी नहीं हुई है। न्यायाधीश अरिजीत पसायत और अशोक कुमार गांगुली की पीठ ने यह व्यवस्था दी है। पीठ ने कहा कि औपचारिक रूप से शादी नहीं होने पर भी आईपीसी की धारा 304 बी (दहेज मृत्यु) और 498ए (महिला को उसके पति या परिवार के सदस्यों द्वारा प्रताड़ित करना) लागू होगी। पीठ ने इसे स्पष्ट करते हुए कहा कि यह तब भी लागू होगा जब पुरुष यह दावा करे कि जो महिला उसे परेशान करने का आरोप लगा रही है उससे उसकी कानूनी रूप से शादी नहीं हुई है।

आईपीसी की धारा 494 के तहत एक हिंदू महिला या पुरुष पहली शादी का निर्वाह करते हुए दूसरी शादी नहीं कर सकता। इस तरह की किसी भी स्थिति में शादी कानून की नजर में अवैध है। लेकिन पीठ ने कहा कि यह उचित होगा कि किसी महिला को प्रताड़ित करने या मजबूर करने से जुड़े किसी मामले में इस तरह के वैवाहिक संबंध की स्थिति में पुरुष को पति मान लिया जाए। पीठ ने कहा कि ऐसे किसी भी उद्देश्य के लिए धारा 304 बी/498ए के प्रावधान एक-एक करके लागू होंगे, चाहे शादी की सच्चाई कुछ भी हो।
पीठ ने यह नियमन आंध्र प्रदेश के के. सुब्बाराव की अपील खारिज करते हुए दिया। खुद को पत्‍‌नी बताने वाली एक महिला द्वारा दर्ज उत्पीड़न की शिकायत के खिलाफ उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी। सुब्बाराव ने दावा किया था कि वह महिला कानूनी रूप से उसकी पत्‍‌नी नहीं है, क्योंकि वह एक अन्य महिला से पहले ही शादी कर चुके हैं। आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट इस तर्क को पहले ही खारिज कर चुका था। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले को उचित बताते हुए कहा कि ऐसी अपील स्वीकार करने से महिला उत्पीड़न को बढ़ावा मिलेगा।
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One thought on “अवैध वैवाहिक संबंधों में भी दहेज विरोधी कानून लागू होंगे”

  1. निर्णय पूरा पढ़ चुका हूँ। सही निर्णय है। समाज में प्रचलित संबंधों की कानून इस हद तक अनदेखी नहीं कर सकता जिस से उत्पीड़न उत्पन्न होने लगे। यह सिद्धान्त तो 494 पर भी लागू होना चाहिए।

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