1984 दंगों का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंचा

सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल कर वर्ष 1984 के सिख विरोधी दंगों की निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग की गई है। याचिका में सीबीआई को जांच से संबंधित सारा रिकार्ड पेश करने और जांच के बारे में जाहिरा शेख मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय मानदंडों का पालन करने का निर्देश देने की मांग की गई है। यह जनहित याचिका मंजीत सिंह बुटालिया ने वकील हर्षवीर प्रताप शर्मा के जरिये दाखिल की है। बुटालिया स्वयं वकील हैं और दिल्ली हाईकोर्ट में वकालत करते हैं।

याचिका में सीबीआई और केन्द्रीय सर्तकता आयोग [सीवीसी] को पक्षकार बनाया गया है। आरोप लगाया गया है कि दिल्ली में हुए 1984 के दंगों की जांच में सीबीआई ने जाहिरा शेख मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय दिशानिर्देशों का पालन नहीं किया है। और न ही केन्द्रीय सर्तकता आयोग [सीवीसी] ने ही विनीत नारायण मामले में तय मानदंडों का पालन किया है। कहा गया है कि जिस मामले की पिछले 25 सालों से जांच चल रही थी उसमें ठीक चुनाव के समय रिपोर्ट दाखिल की गई यह रिपोर्ट गत 29 मार्च को सील बंद लिफाफे में दाखिल की गई थी और जान-बूझ कर रिपोर्ट का चुनिंदा अंश मीडिया में लीक किया गया।

याचिका में मांग की गई है कि सीबीआई को 1984 दंगों की जांच का सारा रिकार्ड पेश करने का आदेश दिया जाए। इतना ही नहीं, सीबीआई सुप्रीम कोर्ट में स्थिति रिपोर्ट दाखिल कर बताए कि उसने किस तरह मामले की निष्पक्ष जांच की है। यह भी कहा गया है कि दंगों के मामलों की आगे की जांच जाहिरा शेख मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय मानदंडों के मुताबिक की जाए। पीड़ित पक्ष से बात करके एक निष्पक्ष वकील को लोक अभियोजक नियुक्त करने का सीबीआई को निर्देश दिए जाने की भी मांग की गई है। जाहिरा शेख के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा किया भी था।

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