सुप्रीम कोर्ट: दोनों पक्षों को पता भी नहीं कि फैसला सुनाया जाने वाला है

सुप्रीमकोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट को उस मामले की दोबारा सुनवाई करने को कहा है जिसमें उसने दोनों पक्षों की अनुपस्थिति में फैसला सुनाया था। यहां तक कि दोनों पक्षों को पता भी नहीं था कि उस दिन फैसला सुनाया जाने वाला है। तमिलनाडु सरकार और एक सीमेंट निर्माता कंपनी के बीच के विवाद से जुड़े मामले मे सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति बी.एन.अग्रवाल और न्यायमूर्ति जी.एस. सिंघवी की पीठ ने 6 अप्रैल को हाईकोर्ट को निर्देश दिया कि वह दोनों पक्षों के दलील सुनने के बाद मामले में फैसला सुनाए।

यह मामला एक बिल से संबंधित है जो तिरुनेलवेली के जिलाधिकारी ने इंडिया सीमेंट लिमिटेड को तामिरांबरानी नदी का पानी सीमेंट निर्माण के लिए इस्तेमाल करने पर भेजा था। कंपनी ने इस बिल को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट की शरण ली और छह सितम्बर 2006 को एक सदस्यीय पीठ ने राज्य सरकार के आदेश को रद्द कर दिया। इसके बाद सरकार ने इस फैसले को हाईकोर्ट की एक खंडपीठ में चुनौती दी जिसमें दो न्यायधीश थे। न्यायालय के कागजात के मुताबिक मामले की सुनवाई मार्च के तीसरे सप्ताह में किसी समय होनी थी लेकिन गत 18 मार्च को खंडपीठ ने न्यायालय की साप्ताहिक सूची से मामले को उठाया और दोनों पक्षों की अनुपस्थिति में सरकार के पक्ष में फैसला सुना दिया। इसके बाद सीमेंट कंपनी ने सुप्रीमकोर्ट में अपील की।
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