लश्कर के चार आतंकियों की सजा बरकरार

पोटा के आरोपी लश्कर-ए तोएबा के चार आतंकियों की सजा हाईकोर्ट ने बरकरार रखी है। निचली अदालत ने इन लोगों को 10-10 साल कारावास व एक-एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। जस्टिस पीके भसीन व जस्टिस बी एन चतुर्वेदी की पीठ ने यह फैसला सुनाया है। पीठ ने कहा कि 13 दिसंबर 2001 को संसद पर आतंकी हमला किया गया था। जिसमें कई लोग मारे गए थे। एक आतंकी संगठन ने यह हमला देश के सम्मान पर कराया था। इसलिए आतंकी संगठन से जुड़े आरोपियों के प्रति किसी भी तरह की रहमदिली नहीं बरती जा सकती है। पीठ ने कहा कि ऐसे आतंकियों के खिलाफ पोटा लगाए जाने का पुलिस व रिव्यू कमेटी का निर्णय सही था। निचली अदालत ने सजा भी ठीक सुनाई थी।

इस मामले में 14 जनवरी 2002 को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने कोटला मुबारकपुर स्थित करण हॉस्टल पर छापा मारकर मो.अफजल कुम्हार, बिलाल अहमद, अंसार अहमद डार व आदिल नाजिर कीन को गिरफ्तार किया था। इनके ठिकाने से तीन किलो आरडीएक्स, दो डेटोनेटर व हवाला के पांच लाख रुपये बरामद किए गए थे। इनकी निशानदेही पर तीन और आरोपी पकड़े गए थे। सभी पर पोटा लगाया गया था। पोटा रिव्यू कमेटी ने पांच में से दो आरोपियों पर से पोटा हटा दिया था। निचली अदालत ने सजा सुनाए जाने के दौरान एक को बरी भी कर दिया था। साथ ही इन चारों के खिलाफ पोटा की विभिन्न धाराओं व अन्य धाराओं के तहत 10-10 साल कारावास व एक-एक लाख जुर्माने की सजा सुनाई थी। ये आरोपी गणतंत्र दिवस पर देश में आतंक फैलाने आए थे।
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  • भारतीय दंड संहिता

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