बच्चे का संरक्षण उसकी नानी को भी दिया जा सकता है

सुप्रीम कोर्ट ने व्यवस्था दी है कि पर्याप्त देखभाल करने में पिता के सक्षम न होने पर बच्चे का संरक्षण उसकी नानी को भी दिया जा सकता है। न्यायमूर्ति तरुण चटर्जी और न्यायमूर्ति एचएल दत्तू की पीठ ने कहा, ‘गार्जियन एंड वा‌र्ड्स अधिनियम के तहत बच्चों के संरक्षण का अधिकार उनके प्राकृतिक अभिभावकों को होता है, लेकिन यह अधिकार असीम नहीं है और अदालतों से बच्चे के कल्याण पर सर्वाधिक ध्यान देने की उम्मीद की जाती है।’ शीर्ष अदालत ने अनघा नाम की बच्ची का संरक्षण उसकी नानी अंजलि कपूर को देते हुए यह व्यवस्था दी।

इससे पूर्व, एक निचली अदालत और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बच्ची का संरक्षण उसके पिता राजीव बैजल को देने का आदेश दिया था, क्योंकि वह उसका प्राकृतिक अभिभावक था। बच्ची के संरक्षण को लेकर कानूनी जंग उस समय शुरू हुई जब पांच मई 2001 को समय पूर्व बच्चे को जन्म देने के बाद राजीव की पत्नी मेघना का निधन हो गया। अंजलि का कहना था कि राजीव बच्ची की देखभाल करने में सक्षम नहीं है और यहां तक कि वह Incubator (कमजोर शिशुओं को जीवित रखने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली ताप मशीन) में रखी अपनी बेटी को देखने अस्पताल तक नहीं आया। उसने यह भी कहा कि राजीव की आर्थिक हालत ठीक नहीं है और वह बच्ची को अच्छी जिन्दगी नहीं दे सकता। वह हर महीने लगभग पांच हजार रुपए कमा पाता है। 
हालांकि निचली अदालत और बाद में हाईकोर्ट ने अंजलि के आग्रह को खारिज कर दिया। इसके बाद उसने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की। बच्ची की नानी के आग्रह पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उल्लेख किया कि कई नोटिस जारी किए जाने के बावजूद राजीव ने जवाब नहीं दिया और न ही अदालत में पेश हुआ। शीर्ष अदालत ने कहा कि हमारी जानकारी में यह भी आया है कि उसने दूसरी शादी कर ली है और उसके एक बच्चा भी है। बच्ची को सौतेली मां की देखभाल में रहना पड़ेगा। न्यायालय ने कहा कि इस बीच बच्ची ऐसे माहौल में अपनी नानी के परिवार में घुल मिल गई जो उसकी वृद्धि में सहायक था। 
राजीव से संबंधित साक्ष्य पर विचार करते हुए शीर्ष अदालत ने कहा, ‘हमें ऐसा प्रतीत होता है कि उसने कई लोगों से कर्ज लिया है और क्योंकि उसकी आमदनी कम है, इसलिए वह बच्ची को अच्छी जिन्दगी नहीं दे सकता।’ 
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