काजी के फैसलों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट/ हाई कोर्ट में अपील हराम

स्वात घाटी में तालिबान और सरकार के बीच समझौता कराने और वहां इस्लामी कानून लागू कराने में प्रमुख भूमिका निभाने वाले चरमपंथी धर्मगुरू सूफी मोहम्मद ने कहा है कि कई साल से मलाकंद डिविजन में शरीयत लागू करने के लिए संघर्ष चल रहा है। अब वह रंग ला रहा है। मलाकंद डिविजन में ही स्वात आता है। सूफी ने दावा किया कि मलाकंद से तमाम गैर इस्लामी कानूनों को जल्द ही खत्म कर दिया जाएगा। तहरीक सुप्रीमो ने स्वात में इस्लामी कानून पर पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के अनुमोदन से पहले ही वहां काजी या इस्लामी अदालतें स्थापित कर दी थी। उनका कहना है कि काजी की अदालत के फैसलों के खिलाफ किसी अन्य दीवानी अदालत में अपील नहीं की जा सकती।

सूफी का कहना है कि काजी की अदालतों के फैसलों को सिर्फ दारूल कजा में ही चुनौती दी जा सकती है। दारूल कजा शरीयत व्यवस्था की उच्चतर अदालत है। तहरीक सुप्रीमो का मानना है कि हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट शरीयत का उल्लंघन करते हैं और काजी के फैसलों के खिलाफ इस तरह की संस्थाओं में अपील हराम या अवैध होगी। सूफी ने कहा कि दारूल कजा के अंतिम फैसलों को भी हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में चुनौती नहीं दी जा सकती। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की न्यायिक व्यवस्था को शरीयत के अनुरूप होना चाहिए।
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