कसाब को नहीं मिलेगा उर्दू में आरोप पत्र

मुंबई हमले की सुनवाई कर रहे विशेष अदालत के न्यायाधीश एमएल तहलियानी ने पाकिस्तानी आतंकवादी अजमल अमीर कसाब के वकील अब्बास काजमी की 11 हजार पृष्ठों का आरोप पत्र उर्दू में कसाब को उपलब्ध कराने की याचिका को खारिज करते हुए आरोप पत्र और अन्य संबंधित दस्तावेजों के अध्ययन के लिए दो मई तक का समय दिया है. श्री काजमी ने कल अदालत में याचिका दाखिल कर आरोप पत्र और संबंधित अन्य दस्तावेजों के अध्ययन के लिए चार सप्ताह का समय मांगा था. श्री तहलियानी ने काजमी के चार सप्ताह का समय मांगे जाने पर कहा कि आतंकवादी हमले की सुनवाई दिन प्रति दिन करने के लिए यह समय बहुत अधिक है. इसलिए उन्हें दो मई तक समय दिया गया. उन्होंने कहा कि चार सप्ताह का समय देना उचित नहीं होगा. इसलिए आरोपपत्र के अध्ययन के लिए 11 दिन का समय दिया जा रहा है. 

श्री काजमी ने एक और याचिका दाखिल कर 11 हजार पृष्ठों के आरोप पत्र की प्रति उर्दू में उपलब्ध कराने की मांग की थी, जिसे न्यायाधीश ने अस्वीकार कर दिया. श्री तहलियानी ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, कि आरोपी की भाषा में आरोप पत्र उपलब्ध कराया जाये.  महाराष्ट्र सरकार ने 1998 में एक आदेश जारी कर कहा था, कि उच्च न्यायालय को छोड अन्य अदालतों में मराठी में कार्यवाही की जा सकती है. श्री काजमी कि एक अन्य याचिका दाखिल कर मांग की है, कि हमले के समय कसाब नाबालिग था,  इसकी जांच होनी चाहिए इस पर अदालत ने निर्णय देने की तारीख 24 अप्रैल तय की है.  कसाब के सह आरोपी सबाउद्दीन अहमद के वकील एजाज नकवी ने सबाउद्दीन के साथ पुलिस हिरासत में यातना का आरोप लगाने वाली याचिका को आज वापस ले लिया.

अजमल कसाब के वकील ने यह भी कहा है कि अगर जरूरत पड़े तो उन्हें पाकिस्तान जाने दिया जाए।

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