अब पुलिस, चार्जशीट से छेड़छाड़ नहीं कर पायेगी

2 अप्रैल को जस्टिस एस. बी. सिन्हा और पी. सदाशिवम की बेंच ने अतिरिक्त चार्जशीट के बहाने चार्जशीट के मूल स्वरूप में बदलाव लाने की परंपरा पर रोक लगाने का आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट की इस नई व्यवस्था के बाद उम्मीद की जा सकती है कि किसी जांच की दिशा बदलने के लिए पुलिस, चार्जशीट में छेड़छाड़ नहीं कर पाएंगी। इस आदेश में कहा गया है कि पुलिस मामले की और अधिक जांच के नाम पर अडिशनल चार्जशीट दाखिल करके पुरानी चार्जशीट में बड़ा बदलाव नहीं ला सकती। इसका मतलब है कि अगर पुलिस ने किसी शख्स को पहली चार्जशीट में दोषी पाया था तो अतिरिक्त चार्जशीट दाखिल कर उसे क्लीन चिट नहीं दे सकती। सीआरपीसी के सेक्शन 173 के तहत पुलिस को अधिकार है कि वह चार्जशीट दाखिल करने के बाद भी जांच आगे जारी रख सकती है। और अगर नए सबूत मिलते हैं तो उनके आधार पर एक अतिरिक्त चार्जशीट दाखिल कर सकती है।

धनंजय महापात्र, नवभारत टाईम्स में कहते हैं कि यह कानूनन जरूरी नहीं है कि आगे जांच बढ़ाने के लिए मैजिस्ट्रेट से अनुमति मांगी जाए। ऐसा करना पुलिस का वैधानिक हक है। लेकिन अगर पुलिस नए सिरे से जांच करना चाहती है तो उसे संबंधित मैजिस्ट्रेट की पूर्वानुमति लेनी होगी। जस्टिस सदाशिवम ने सीआरपीसी के सेक्शन 173 (8) को समझाते हुए कहा कि आगे जांच बढ़ाने का मतलब है पहले की गई जांच को जारी रखना। यह नई जांच नहीं है जो पहले की जांच को पूरी तरह नकार कर की जाती है। 

दैनिक जागरण के मुताबिक, न्यायमूर्ति एस बी सिन्हा और न्यायमूर्ति पी सदाशिवम की पीठ ने कहा, ‘आगे की जांच के पीछे की मुख्य सोच, सत्य तक पहुंचने और वास्तविक तथा ठोस न्याय करने की है। महज देरी को आधार बनाकर आगे की जांच के लिए जांच एजेंसी के हाथ नहीं बांधे जा सकते।’ सीआरपीसी की धारा 173 (आरोपपत्र और पुलिस रिपोर्ट से संबंधित) की व्याख्या करते हुए सुप्रीमकोर्ट ने कहा कि उपधारा (दो) और उपधारा (आठ) से स्पष्ट है कि जांच पूरी होने के बाद भी जांच एजेंसी को आगे की जांच करने का पूरा अधिकार है लेकिन उपधारा आठ के तहत ‘नए सिरे से जांच’ अथवा ‘दोबारा जांच’ नहीं की जा सकती।

शीर्ष अदालत ने यह व्यवस्था हत्या के मामले के अभियुक्त रामा चौधरी और कुछ अन्य की अपील को खारिज करते हुए दी। इन लोगों ने सत्र अदालत के उस फैसले को चुनौती दी थी जिसमें हत्या के मामले में आठ अन्य अभियुक्तों को सम्मन जारी किया गया था जबकि मूल आरोप पत्र में उनका नाम नहीं था।

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2 thoughts on “अब पुलिस, चार्जशीट से छेड़छाड़ नहीं कर पायेगी”

  1. यह एकदम सही निर्णय है।

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  2. राहत मिली सुनकर.

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