अदालतों को अपराधियों के प्रति गैरजरूरी संवेदना नहीं जतानी चाहिए

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अदालतों को अपराधियों के प्रति गैरजरूरी संवेदना नहीं जतानी चाहिए। सर्वोच्च अदालत ने कहा कि ऐसा करने से जनता का कानून से भरोसा उठ जाएगा और देश में अराजकता फैल जाएगी। जस्टिस अरिजीत पसायत और मुकुंदकम शर्मा की पीठ ने एक फैसले में कहा, ‘अपर्याप्त सजा देकर गैरजरूरी संवेदना दिखाने से कानून को नुकसान पहुंचेगा। इससे कानून के प्रति आम लोगों का भरोसा टूटेगा।’ सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘इसलिए यह सभी अदालतों का कर्तव्य है कि अपराध की प्रकृति और उसे अंजाम देने के तरीके को देखते हुए उपयुक्त सजा दी जानी चाहिए।’

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘समाज की सुरक्षा और आपराधिक गतिविधियों पर लगाम कसना कानून का काम है। इसे उपयुक्त सजा के माध्यम से ही हासिल किया जा सकता है।’ पीठ ने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के एक आदेश को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। अदालत ने हत्या के प्रयास से जुड़े इस मामले में कुछ दोषियों की सजा दस साल से घटाकर सात साल कर दी थी।
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