FIR रद्द कराने के लिए, वरुण गांधी की याचिका खारिज

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भाजपा नेता वरुण गांधी की यह अपील ख़ारिज कर दी है कि कथित भड़काऊ भाषण के लिए उनके ख़िलाफ़ दायर एफ़आईआर को ख़त्म कर दिया जाए। हाईकोर्ट ने कहा है कि यह प्रथमदृष्टया यह मामला सही प्रतीत होता है इसलिए FIR को ख़त्म नहीं किया जा सकता। इसके बाद वरुण गांधी के पास 27 मार्च के बाद गिरफ़्तारी से बचाव का कोई रास्ता नहीं बचा है सिवाय इसके कि वे सुप्रीम कोर्ट जाकर अग्रिम ज़मानत की अर्ज़ी दें। वैसे उनके वकीलों ने कहा है कि वे सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करेंगे. इससे पहले वरुण गांधी को दिल्ली हाईकोर्ट ने 27 मार्च तक के लिए अग्रिम ज़मानत दी है।

वरुण गांधी पर आरोप है कि उन्होंने गत छह मार्च को अपने चुनाव क्षेत्र पीलीभीत में मुसलमानों के ख़िलाफ़ भड़काऊ भाषण दिया था। वरुण गांधी ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा है कि उन्होंने ऐसा भाषण कभी दिया ही नहीं था और उनके भाषण की जो CD जारी की गई है उसके साथ छेड़छाड़ की गई है। वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी के पुत्र 29 वर्षीय वरुण गांधी के ख़िलाफ़ चुनाव आयोग के निर्देश पर पीलीभीत के ज़िलाधिकारी ने एफ़आईआर दर्ज करवाई थी। वरुण गांधी के ख़िलाफ़ बारखेड़ा पुलिस स्टेशन में सेक्शन 153 ए और 188 के तहत एफ़आईआर दर्ज किया गया है. इन धाराओं के अंतर्गत धार्मिक उन्माद भड़काने और सरकारी आदेश की अवज्ञा का मामला बनता है। इसके अलावा उनके ख़िलाफ़ जनप्रतिनिधित्व क़ानून की धारा 124 के तहत भी मामला दर्ज किया गया है।

वरुण गांधी ने गत 19 मार्च को इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. इस याचिका में अपील की गई थी कि उनके ख़िलाफ़ दायर FIR को ख़त्म किया जाए। लेकिन हाईकोर्ट में न्यायाधीश इम्तियाज़ मुर्तज़ा और एससी निगम के एक पीठ ने इस याचिका को ख़ारिज कर दिया। अदालत ने कहा है कि वह एफ़आईआर ख़त्म करने और वरुण गांधी को अग्रिम ज़मानत देने का कोई कारण नहीं देखती।

VN:F [1.9.22_1171]
Rating: 0.0/10 (0 votes cast)
Print Friendly, PDF & Email

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *


Enable Google Transliteration.(To type in English, press Ctrl+g)