मुख्य न्यायाधीश ने अदालतों की जरूरतों के लिए धन जारी करने की अपील की

सुप्रीमकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश केजी बालाकृष्णन ने 2८ मार्च को, अदालतों की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए धन जारी करने की सभी राज्यों से अपील की है। विधिक सेवा प्राधिकरणों की सातवीं अखिल भारतीय बैठक के उद्घाटन के अवसर पर न्यायमूर्ति बालाकृष्णन ने कहा कि पिछले दो वर्ष के दौरान देश में 2500 न्यायिक अधिकारियों के रिक्त पद भरे गए हैं और 400 से 600 अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जो जल्दी ही न्यायिक सेवा से जुड़ जाएंगे। उन्होंने देश के सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों से अदालतों की बुनियादी जरूरतों की पूर्ति के लिए आवश्यक निवेश की अपील करते हुए कहा कि जब तक हमारे पास पर्याप्त संख्या में अदालतें नहीं होंगी तब तक यह कहना निरर्थक होगा कि अदालतों में मुकदमों का निपटारा नहीं हो पा रहा है, लेकिन मैं आप सभी को आश्वस्त करना चाहता हूं कि हम मौजूदा प्रारुप के तहत सर्वश्रेष्ठ योगदान देने का प्रयास कर रहे हैं।

मुकदमा लड़ने वालों के कानूनी अधिकारों के बारे में जागरूकता फैलाने में राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) और राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (SALSA) के योगदान की प्रशंसा करते हुए मुख्य न्यायाधीश ने नालसा के सुचारू रूप से संचालन में विधि महाविद्यालयों के छात्रों, प्रोफेसरों तथा गैर सरकारी संगठनों के सहयोग की आवश्यकता जताई। इस अवसर पर उच्चतम न्यायालय विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष न्यायमूर्ति एसबी सिन्हा, कर्नाटक उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश पीडी दिनकरन, सुप्रीमकोर्ट के न्यायाधीश अरिजीत पसायत और राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य उपस्थित थे।

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One thought on “मुख्य न्यायाधीश ने अदालतों की जरूरतों के लिए धन जारी करने की अपील की”

  1. वे पहले भी कह चुके हैं कि उन्हें 10000 अधीनस्थ अदालतें चाहिए। जो राज्यों ने ही खोलनी है। लेकिन इस पर एक भी मुख्यमंत्री ने अपना मुहँ नहीं खोला है। लगता है न्याय के प्रति हमारे राजनीतिज्ञ उदासीन ही नहीं है बल्कि उन्हें उस की कोई परवाह नहीं है।

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