भविष्य निधि घोटाला: जिन न्यायाधीशों के खिलाफ आरोप नहीं, उनके नाम भी शामिल किए जाएं।

उच्चतम न्यायालय ने २७ मार्च को, सात करोड़ रुपये के गाजियाबाद भविष्य निधि घोटाला कांड में एक सप्ताह के भीतर ताजा स्थिति रिपोर्ट दायर करने का निर्देश, केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को दिया। सीबीआई ने न्यायमूर्ति अरिजीत पसायत, न्यायमूर्ति वी एस सिरपुरकर और न्यायमूर्ति जीएस सिंघवी की खंडपीठ को सीलबंद लिफाफे में दो रिपोर्ट सौंपी और तीसरी रिपोर्ट के लिए कुछ और समय मांगा, जिसके बाद न्यायालय ने सीबीआई को एक सप्ताह का समय दिया।

खंडपीठ ने सीबीआई को यह भी कहा कि जांच के दौरान जिन न्यायाधीशों के खिलाफ किसी तरह का आरोप सामने नहीं आया है, उनके नाम भी इस रिपोर्ट में शामिल किए जाएं। न्यायालय ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए एक अप्रैल की तारीख निर्धारित की है। गाजियाबाद की निचली अदालत के सामान्य भविष्य निधि खाते से सात करोड़ रुपये की हेराफेरी के मामले में 36 न्यायाधीशों के शामिल होने का आरोप हैं जिनमें से एक उच्चतम न्यायालय के मौजूदा न्यायाधीश हैं जबकि 11 विभिन्न उच्च न्यायालयों और 24 जिला एवं सत्र अदालतों से जुडे हैं। उच्चतम न्यायालय ने इस घोटाले की जांच के लिए सीबीआई जांच के आदेश दिए थे।

इस कांड के मुख्य अभियुक्त आशुतोष अस्थाना ने अपराध प्रक्रिया संहिता (CRPC) की धारा 164 के तहत विशेष न्यायाधीश रमा जैन के समक्ष अपना बयान दर्ज कराया था, जिसमें उसने घोटाले से लाभान्वित 36 न्यायाधीशों के नामों का खुलासा किया था।

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2 thoughts on “भविष्य निधि घोटाला: जिन न्यायाधीशों के खिलाफ आरोप नहीं, उनके नाम भी शामिल किए जाएं।”

  1. बड़ी उचित खबर है।

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  2. lokesh bhai , abhee to dekhte rahiye ki is maamle mein kya kaya hotaa hai. ye nyaaypaalikaa ke itihaas mein sabse jyaadaa samvedansheel saabit ho raha hai.

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