जजों के अधिकार क्षेत्र को लेकर, चेक बाऊंस पर अहम फैसला

बांबे हाईकोर्ट ने में चेक बाउंस मामले की सुनवाई के अधिकार क्षेत्र को लेकर एक अहम व्यवस्था दी है कि महज इस आधार पर किसी मजिस्ट्रेट कोर्ट को सुनवाई का अधिकार नहीं मिल सकता कि चेक उसके क्षेत्र में जमा किया गया था। चेक बाउंस के दो मामले हाईकोर्ट के समक्ष थे और दोनों ही अदालत के अधिकार क्षेत्र से जुड़े थे। मामला समान प्रकृति का होने का कारण हाई कोर्ट ने एक ही नियमन जारी किया। 

एक मामला वीडियोकान कंपनी का था। मोनिशा एजेंसी के मालिक डी के मोहंती ने जून 2006 में कंपनी को एक चेक दिया था, जो बाउंस कर गया। यह चेक उड़ीसा के खुर्दा स्थित यूको बैंक से जारी किया गया था और कंपनी ने इसे महाराष्ट्र के अहमदनगर में स्टेट बैंक आफ इंडिया की शाखा में जमा किया था। चूंकि चेक बाउंस अहमदनगर में हुआ इसलिए वीडियोकान ने अहमदनगर मजिस्ट्रेट की अदालत में मुकदमा दर्ज कराया। मोहंती ने इस पर आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि अहमदनगर की अदालत को मामले की सुनवाई का अधिकार नहीं है। लेकिन, मजिस्ट्रेट अदालत ने इसे अपने अधिकार क्षेत्र में बताया।

एक अन्य मामले में अहमदनगर अदालत ने अलग नजरिया पेश किया। इस मामले में मुंबई की एक कंपनी ने भुवनेश्वर स्थित कल्याणी एजेंसी पर अहमदनगर में मुकदमा दर्ज कराया। यह चेक भी यूको बैंक की खुर्दा शाखा से जारी हुआ था। लेकिन, अहमदनगर की अदालत ने कहा कि मामला उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर है।

हाईकोर्ट के जज वी आर किनगावकर ने अपने फैसले में कहा कि दोनों ही मामलों में चेक उड़ीसा से जारी हुए, इसलिए महज इस आधार पर कि चेक अहमदनगर शाखा में डाले गए, वहां की मजिस्ट्रेट अदालत को मामले की सुनवाई का अधिकार नहीं बनता। जज ने कहा कि जहां व्यक्ति को चेक बाउंस होने की नोटिस मिली और जहां खाते में पैसा न होने के कारण भुगतान नहीं हो सका, वहां पर ही मामले की सुनवाई का अधिकार बनता है। उन्होंने फैसला दिया कि अहमदनगर की अदालत इन मामलों की सुनवाई नहीं कर सकती।
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One thought on “जजों के अधिकार क्षेत्र को लेकर, चेक बाऊंस पर अहम फैसला”

  1. इस मामले में अभी भी असमंजस है। अपराध के आरंभ से लेकर पूर्ण होने तक जो जो न्याय क्षेत्र हैं वहां की अदालतों को क्षेत्राधिकार होता है। लेकिन चैक बाउंस मामले में चैक बाउंस होने से भी कहाँ अपराध गठित होता है। अपराध तो तब होता है जब चैक प्रदाता को नोटिस मिलता है और पन्द्रह दिनों में वह चैक की धनराशि का भुगतान नहीं करता है। मुम्बई उच्चन्यायालय का यह निर्णय पूरा पढ़ने पर कुछ कहा जा सकता है।

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