चेक बाउंस मामले में पूर्व उप-राज्यपाल को कैद

चेक बाउंस होने के अभियोग में जिला अदालत ने 24 मार्च को मिजोरम के उप राज्यपाल रह चुके एसके छिब्बर और पूर्व आईएएस एससी छाबड़ा सहित पांच लोगों को डेढ़-डेढ़ साल की कैद की सजा सुनाई है। छिब्बर और छाबड़ा मे. भिवानी डेनिम एंड एपरेल्स लिमिटेड के डायरेक्टर थे, जिसकी तरफ से चेक जारी किया गया था। सजा पाने वाले बाकी तीन लोगों में कंपनी के एमडी सुभाष साहनी, डायरेक्टर श्रवण के साहनी,और जनरल मैनेजर वीके गर्ग शामिल हैं। अदालत ने पांचों पर पांच-पांच हजार रुपए का जुर्माना भी किया है।

सजा सुनाये जाने के दूसरे दिन 25 मार्च को ही पूर्व आईएएस एससी छाबड़ा का निधन हो गया।

इस मामले में गोंटरमन पीपर्स (इंडिया) लिमिटेड की ओर से एचसी गुप्ता ने याचिका दायर की थी। अदालत में गोंटरमन पीपर्स लिमिटेड के वकील ने बताया कि उनके मुवक्किल से मे.भिवानी डैनिम एंड एपारेल्स ने 1,34,86,290 रुपये का कॉटन यार्न खरीदा। इनमें से 47,83,041 रुपये का भुगतान उसी समय कर दिया गया था। शेष राशि के लिए 6 चेक दिए गए। लेकिन चेक बैंक में लगाए गए तो खाते में पर्याप्त राशि न होने के कारण बाउंस हो गए। जिस पर गोंटरमन पीपीर्स ने तब भिवानी कंपनी के डायरेक्टर व पूर्व राज्यपाल एसके छिब्बड़ व पूर्व आईएएस एससी छाबड़ा सहित पांच लोगों ने खिलाफ अदालत में याचिका दायर कर दी थी। कंपनी के डायरेक्टर रह चुके पूर्व आईएएस एससी छाबड़ा वर्ष 1958 में जालंधर में उपायुक्त रहने के साथ वर्ष 1971 में लेबर कमिश्नर व दिल्ली नगर निगम में भी तैनात रह चुके हैं।

अपने बचाव में छिब्बर ने कहा कि इस मामले में उनकी जवाबदेही नहीं थी। वह 1974 से 1977 तक मिजोरम के उप राज्यपाल रह चुके हैं, संयुक्त पंजाब के होम सेक्रेटरी और दिल्ली के चीफ सेक्रेटरी भी रह चुके हैं। पूर्व आईएएस छाबड़ा ने भी अपने बचाव में खुद को इस मामले से संबंधित बताते हुए कहा था कि वह नई दिल्ली म्युनिसिपल कॉपरेरेशन के अध्यक्ष रह चुके हैं और यदि उनकी तरफ से ऐसी हरकत नहीं की जा सकती।

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One thought on “चेक बाउंस मामले में पूर्व उप-राज्यपाल को कैद”

  1. 138 परक्राम्य विलेख अधिनियम का अपराध ही इतना विचित्र है कि इस पर पुनर्विचार की आवश्यकता है।

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