अदालती कागजात पहुंचाने के लिए फेसबुक का इस्तेमाल करेंगीं अदालतें!

भारत की तरह ही ब्रिटिश न्यायशास्त्र पर आधारित न्याय प्रणाली अपनाने वाले न्यूजीलैंड ने बचाव पक्ष को अदालती कागजात पहुंचाने कानूनी नोटिस भेजने में सोशल नैटवर्किग वैबसाइटफेसबुकके इस्तेमाल को हरी झंडी देकर राह दिखाई है। कोर्ट की कार्रवाई में सूचना प्रौद्योगिकी के इस तरह के व्यापक इस्तेमाल से देश की अदालतों में लंबित मामलों के अंबार को कम किया जा सकता है। भारत में फिलहाल विभिन्न अदालतों में 2.30 करोड़ मामले लंबित हैं। प्रतिदिन इन मामलों की संख्या में इजाफा होता जा रहा है।

अदालतों में इन्टरनेट के मार्फत याचिका दायर करने और वेबसाईट पर फैसलों को प्रदर्शित करने का दायरा बढ़ाया जा रहा है। दैनिक भास्कर की ख़बर है कि … इसे भारत में तभी लागू किया जा सकता है, जब वीडियो कांफ्रेंस की सुविधा हो और हर कोर्ट को कंप्यूटरों व ई-प्रणाली से जोड़ा जाए। … भ्रष्टाचार में 25 फीसदी कमी आने के अलावा अदालती खर्च भी बहुत कम हो जाएगा। … 25 साल या इससे अधिक समय लेने वाले मामले पांच साल में ही निपट जाएंगे। एक बार अदालतों को यह डेटाबेस उपलब्ध हो जाए और ई-मेल एड्रेस पूल में एकत्रित हो जाए तो संबंधित पक्ष को अदालती कागजात या नोटिस पहुंचाना मुश्किल नहीं होगा।

उल्लेखनीय है कि फेसबुक के दुनियाभर में 14 करोड़ उपयोगकर्ता हैं। ऑस्ट्रेलियाई राजधानी परिक्षेत्र के सुप्रीम कोर्ट ने गत दिसंबर में कहा था कि सोशल नैटवर्किग साइट पर बचाव पक्ष को अधिसूचना के जरिए मूल फैसला पहुंचाया जा सकता है।

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4 thoughts on “अदालती कागजात पहुंचाने के लिए फेसबुक का इस्तेमाल करेंगीं अदालतें!”

  1. ये तो बढि़या है। लेकिन भारत में ई-गवर्नेंस के प्रति सरकारी महकमों का जो ठंडा रवैया है, उसे देखते हुए इस तरह की चीजों को लागू करना आसान नहीं होगा।

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  2. अदालतों में ई-गवर्नेस अपनानी होगी। यह भारत में शीघ्र ही होगा। बहुत तेजी से काम चल रहा है। बस हमारे जजों और वकीलों को थोड़ा उत्साह दिखाने की जरूरत है।

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  3. haan lokesh bhai abhee to dekhte jaaiye kyaa sab naya hone waalaa hai.

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  4. सरकार और सरकारी लागे इस बात को जितना जल्‍दी स्‍वीकार कर लें, उतना ही अच्‍छा रहेगा। कभी कभी मुझे लगता है कि व्‍यवस्‍था मे सारी जटिलताएँ सिस्‍टम एक षड़्यंत्र के तहत जान बूझकर पैदा की गई हैं। जान बूझकर पारदर्शिता बढ़ाने वाली युक्तियों से परहेज किया जाता है और उन्‍हें हाशिए पर धकेल दिया जाता है। घूम फिरकर नया सेटअप तैयार करने पर बात फँस जाती है। अरे भाई, नया‍ सिस्‍टम न सही, उपलब्‍ध सिस्‍टम को तो ठीक से एक्‍सप्‍लोर करो…। इसी में कल्‍याण हो जाएगा।

    – आनंद

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