महिला की मर्यादा भंग करना अपराध साबित करने के लिए पर्याप्त, लेकिन मर्यादा की कोई ठोस अवधारणा नहीं!

उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि किसी अभियुक्त को सिर्फ इस आधार पर महिला की मर्यादा भंग करने के लिए सजा दी जा सकती है कि उसके कृत्य से महिला की मर्यादा भंग हो सकती है। न्यायाधीश अरिजित पसायत और अशोक कुमार गांगुली की पीठ ने कहा धारा 354 के तहत अपराध साबित करने के लिए सिर्फ इतना ही पर्याप्त है कि महिला की मर्यादा भंग हो सकती है। सभी मामलों के लिए मर्यादा की कोई ठोस अवधारणा नहीं है। एक लड़की के साथ बलात्कार के मामले में पीठ ने यह फैसला दिया।

शेकारा को एक लड़की के साथ बलात्कार के मामले में सजा दी गई थी और कर्नाटक उच्च न्यायालय ने सजा को बरकरार रखा था। बहरहाल उच्चतम न्यायालय ने मामले को बलात्कार से हटाकर मर्यादा भंग करने तक कर दिया और सजा घटाकर पांच वर्ष कर दी।

इस फैसले की प्रति यहाँ देखी जा सकती है।
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यहाँ आने के लिए इन मामलों की हुई तलाश:
  • धारा ३५४
  • ३५४

One thought on “महिला की मर्यादा भंग करना अपराध साबित करने के लिए पर्याप्त, लेकिन मर्यादा की कोई ठोस अवधारणा नहीं!”

  1. मामला गंभीर लग रहा है, मूल निर्णय देखना पड़ेगा।

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