नाममात्र के यौन संपर्क की दलील, दुष्कर्म के दोष से बरी किए जाने का आधार नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने दुष्कर्म से जुड़े मामलों में अहम व्यवस्था दी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि नाममात्र के यौन संपर्क की दलील किसी आरोपी को दुष्कर्म के दोष से बरी किए जाने का आधार नहीं बन सकती। जस्टिस अरिजीत पसायत और अशोक कुमार गांगुली की पीठ ने एक मामले की सुनवाई करते हुए यह व्यवस्था दी। अपने फैसले में पीठ ने Encyclopedia of crime and justice का जिक्र करते हुए कहा कि दुष्कर्म का दोषी करार देने के लिए मामूली यौन संपर्क ही पर्याप्त है।

सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश की सत्र अदालत द्वारा दोषी ठहराए गए अर्जुन सिंह को चिकित्सकीय सुबूतों के अभाव के आधार पर दुष्कर्म के मामले में बरी करते हुए यह टिप्पणी की। सत्र अदालत ने अर्जुन को सात साल की सजा सुनाई थी। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने भी उसकी सजा बरकरार रखी थी। जिसके खिलाफ अर्जुन ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी।

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