लश्कर-ए-तैबा के संस्थापक की नज़रबंदी की अवधि बढ़ी

लश्कर-ए-तैबा के संस्थापक  जमात-उद-दावा के प्रमुख हाफ़िज़ मोहम्मद सईद की नज़रबंदी दो महीने के लिए बढ़ा दी गई है।  हाफ़िज़ मोहम्मद सईद को 12 दिसंबर को नज़रबंद किया गया था।  पिछले साल 26 नवंबर को मुंबई में हुए हमलों के बाद संयुक्त राष्ट्र ने जमात-उद-दावा को आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया था, जिसके बाद पाकिस्तान में इस संगठन पर कार्रवाई शुरू हुई।  जिसके तहत 12 दिसंबर को हाफ़िज़ मोहम्मद सईद को एक महीने के लिए नज़रबंद कर दिया गया था।  जिसकी अवधि 11 जनवरी को ख़त्म हो रही थी।
लेकिन अब इसे दो महीने और बढ़ा दिया गया है. हाफ़िज़ मोहम्मद सईद लाहौर के जौहर टाउन इलाक़े में स्थित अपने घर में नज़रबंद हैं.

हाफ़िज़ मोहम्मद सईद के दामाद हाफ़िज़ ख़ालिद वलीद द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार पंजाब प्रांत के गृह सचिव नदीम हसन आसिफ़ की ओर से नज़रबंदी बढ़ाने के आदेश जारी हुए है।  इस आदेश के मुताबिक़ क़ानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उनकी नज़रबंदी बढ़ाई जा रही है.

मौलाना हाफ़िज़ मोहम्मद ने 2001 में लश्कर का नेतृत्व छोड़ने की घोषणा करके जमात-उल-दावा की कमान संभाल ली थी।   जमात-उल-दावा को एक इस्लामी चैरिटी बताया जाता है लेकिन भारत का आरोप है कि लश्कर पर पाबंदी के बाद चरमपंथी कार्रवाइयों के लिए उसका इस्तेमाल किया जाने लगा है।   सईद ने कहा था कि वे एक चैरिटी चलाते हैं जिसका मुंबई के हमलों से कोई लेनादेना नहीं है।   जब कि भारत का कहना है कि जमात-उल-दावा असल में लश्कर-ए-तैबा का ही बदला हुआ नाम है और मुंबई हमलों में लश्करे तैबा का हाथ है।

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