तलाकशुदा मुस्लिम महिलाओं को कआर्रक्षित सरकारी नौकरियों के लिए काजी के प्रमाण पत्र मान्य बनाने के लिए प्रयास

राजस्थान में तलाकशुदा मुस्लिम महिलाओं को सरकारी नौकरियों में आरक्षण का लाभ दिलाने के लिए शरीअत कानून को मान्य बनाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य अल्पसंख्‍यक आयोग ने इस आशय का  एक प्रस्ताव  राज्य सरकार को भेजा है जो विचाराधीन है। 
  
सरकारी नौकरियों में तलाकशुदा महिलाओं के विशेष आरक्षण कोटे के लिए अभ्‍यर्थियों को न्यायालय की तलाक डिक्री आवेदन के साथ पेश करनी होती है।  इसके अलावा अन्य किसी भी दस्तावेज को मान्यता नहीं दी गई है।  मुस्लिम महिलाओं को शरीअत के अनुसार महज तलाक-तलाक-तलाक कहने से उन का विवाह संबंध विज्छेद मान लिया जाता है।   इसके बाद उन्हें काजी तलाक का प्रमाणपत्र  दे देता है।   इस आशय की समस्याएं बताते  हुए आयोग ने राज्य सरकार के पास अभिशंसा भेजी है कि मुस्लिम महिलाओं को आरक्षण का लाभ देने के लिए काजी के प्रमाणपत्र को न्यायालय की डिक्री के समकक्ष माना जाए।

आयोग के अनुसार उसके समक्ष ऐसे करीब 25 मामले आ चुके हैं, जिनमें मुस्लिम महिलाओं को इसलिए नौकरी  में आरक्षण का लाभ नहीं मिला, क्योंकि उनके पास न्यायालय की तलाक डिक्री नहीं थी और उनके ससुराल पक्ष वाले न्यायालय में जाने के लिए तैयार नहीं हुए।  अल्पसंख्‍यक आयोग के अध्यक्ष जसवीर सिंह ने यह जानकारी दी है।

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