झारखंड के बर्खास्त जज को राहत देने से इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड के एक जज की बर्खास्तगी के मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। दोहरे हत्याकांड के एक अभियुक्त को जमानत देने के कारण झारखंड हाई कोर्ट ने जज को बर्खास्त करने का फैसला किया था। मुख्य न्यायाधीश के जी बालाकृष्णन के नेतृत्व वाली पीठ ने जज की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि यह फैसला हाई कोर्ट की पूर्ण पीठ का है इसलिए इसमें कुछ नहीं किया जा सकता। पीठ ने बर्खास्त जज की इस दलील से असहमति जताई कि हाई कोर्ट ने उसके खिलाफ यह फैसला इस वजह से किया क्योंकि उसने ऐसे जजों के चयन पर सवाल उठाया था जो परीक्षा में सफल हुए बिना ही जज बन गए थे।

यह मामला वर्ष 2007 का है। जज राजीव कुमार तब चतरा अदालत में तदर्थ जज के रूप में नियुक्त थे और उन्होंने दोहरे हत्याकांड के एक आरोपी को जमानत दे दी थी। राजीव कुमार ने नौकरी से बर्खास्तगी के हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। अपने बचाव में उन्होंने कहा था कि उनकी वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट में उन्हें ईमानदार जज घोषित किया गया है। सुप्रीम कोर्ट के जज मार्कडेय काटजू और पी सथाशिवम की पीठ ने कहा कि राजीव कुमार ने आरोप पत्र में नाम शामिल नहीं होने को आधार बनाकर एक अपराधी को जमानत दे दी जबकि आरोपपत्र में उसका नाम शामिल है।

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