23 हजार पुलिसकर्मियों की बर्खास्तगी का सरकारी आदेश रद्द

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने करीब 23 हजार पुलिसकर्मियों के बर्खास्तगी के उत्तर प्रदेश सरकार के आदेश को रद्द कर दिया है। न्यायमूर्ति डीपी. सिंह ने बर्खास्त पुलिसकर्मी पवन कुमार सिंह और अन्य की ओर से दाखिल याचिका पर अपना फैसला सुनाया। अपने 129 पैरा के आदेश में न्यायमूर्ति सिंह ने कहा कि पुलिसकर्मियों की बर्खास्तगी तौर-तरीकों और नियमों को दरकिनार कर की गई है। इस मामले में वर्ष 2005-06 में पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के कार्यकाल में विभिन्न नियुक्ति बोर्ड द्वारा पुलिसकर्मियों की भर्ती की गई थी। इसके बाद मुख्यमंत्री मायावती ने सत्ता में आने के साथ ही भारतीय पुलिस सेवा के वरिष्ठ अधिकारी शैलजा कांत मिश्र की अध्यक्षता में जांच समिति का गठन किया था।

जांच समिति ने पाया कि नियुक्ति में अनियमितता हुई है तथा नियमों का ध्यान नहीं रखा गया है। समिति की शुरूआती रिपोर्ट के बाद सुश्री मायावती ने सभी पुलिसकर्मियों की बर्खास्तगी के आदेश दे दिए थे। बर्खास्तगी के शासनादेश 11 सितम्बर 2007, 18 सितम्बर 2007 और 30 सितम्बर 2007 को जारी किए गए थे। सरकार के इस आदेश के विरोध में बर्खास्त पुलिसवालों ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। दूसरी ओर राज्य सरकार ने आज कहा कि इस आदेश के खिलाफ इलाहाबाद उच्च न्यायालय में विशेष अपील दायर की जाएगी।

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